Explainer: क्या है एग्जाम में चीटिंग का कानूनक्यों ये नेट और नीट पर लागू नहीं

सरकारी परीक्षाओं में संगठित नकल को दंडित करने वाला अधिनियम 21 जून को नोटिफाई करके लागू कर दिया गया है. हालांकि सीबीआई द्वारा जांच किए जाने के आधार पर रद्द की गई यूजीसी-नेट परीक्षा इस नए कानून के दायरे में नहीं आएगी.

Explainer: क्या है एग्जाम में चीटिंग का कानूनक्यों ये नेट और नीट पर लागू नहीं
हाइलाइट्स ये कानून 21 जून को नोटिफाई हुआ, लिहाजा तभी से हरकत में माना जाएगा नेट और नीट परीक्षा में लीक और गड़बड़ियों की एफआईआर इससे पहले की हालांकि ये कानून छात्रों की नकल और चीटिंग को लेकर सख्त नहीं है सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024 (The Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill, 2024) 21 जून से नोटिफाई करके लागू जरूर कर दिया गया है लेकिन इसमें नीट परीक्षा, यूजीसी-नेट परीक्षा नहीं आएगी, क्योंकि इन पर जो एफआईआर हुई, वो 19 जून को हुई है, जबकि केंद्र का नया कानून 21 जून को लागू हुआ है. इस कानून में सरकारी भर्ती और अन्य परीक्षाओं में चीटिंग और संगठित धोखाधड़ी के लिए 05 साल तक की कैद और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा 2024 (यूजीसी-नेट) परीक्षा नकल और व्यापक गड़बड़ियों के बीच 19 जून को रद्द कर दी गई थी. अब इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा की जा रही है. इस वजह से ये नए कानून के दायरे में नहीं आएगी. वहीं नीट परीक्षा लीक होने के कारण रद्द कर दी गई. इसकी जांच भी सीबीआई ही कर रही है. इसकी पहली एफआईआर मई में ही बिहार पुलिस ने दर्ज की थी. लिहाजा इन दोनों परीक्षाओं में अनियमितताएं और लीक नए कानून के तहत आएंगे, इसमें संदेह है. कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा 21 जून को जारी अधिसूचना में कहा गया है, “सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 (2024 का 1) की धारा 1 की उप-धारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार 21 जून, 2024 को उस तारीख के रूप में नियुक्त करती है, जिस दिन उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे.” इसके तहत कौन से अपराध आएंगे इस कानून में किसी व्यक्ति, व्यक्तियों के समूह या संस्थाओं द्वारा किए गए अपराधों के रूप में “प्रश्न पत्र या उत्तर कुंजी को लीक करना”, “सार्वजनिक परीक्षा में किसी भी तरह से अनाधिकृत रूप से अभ्यर्थी की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता करना” और “कंप्यूटर नेटवर्क या कंप्यूटर संसाधन या कंप्यूटर प्रणाली के साथ छेड़छाड़ करना” के लिए दंड का उल्लेख किया गया है. इनके अलावा, “धोखाधड़ी या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी वेबसाइट बनाना”, “फर्जी परीक्षा आयोजित करना, धोखाधड़ी या आर्थिक लाभ के लिए फर्जी एडमिट कार्ड या ऑफर लेटर जारी करना” और “परीक्षाओं में अनुचित साधन अपनाने की सुविधा के लिए उम्मीदवारों के बैठने की व्यवस्था, तिथियों और शिफ्टों के आवंटन में हेरफेर” भी कानून के तहत दंडनीय अपराधों में शामिल हैं। क्या होगा दंड कानून के अनुसार, “इस कानून के तहत अनुचित साधनों और अपराधों का सहारा लेने वाले किसी भी व्यक्ति या व्यक्तियों को तीन साल से कम नहीं बल्कि पांच साल तक की कैद और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने से दंडित किया जाएगा.हालांकि ये जुर्माना बढ़कर 1 करोड़ रुपए तक भी हो सकता है.” पिछले नियमों के मुताबिक परीक्षा में नकल कराने वाले व्यक्ति को तीन साल का कारावास और 2000 तक के जुर्माने की सजा का प्रावधान था. अधिनियम के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण (public examination authority) द्वारा परीक्षाओं के संचालन के लिए नियुक्त सेवा प्रदाता यानि सर्विस प्रोवाइडर पर भी 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और उससे परीक्षा की आनुपातिक लागत भी वसूली जाएगी. ऐसे सेवा प्रदाताओं को चार वर्ष की अवधि के लिए किसी भी सार्वजनिक परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर भी रोक रहेगी. कौन माने जाते हैं सर्विस प्रोफाइडर अधिनियम में सेवा प्रदाता को किसी भी एजेंसी, संगठन, निकाय, व्यक्तियों के संघ, व्यावसायिक इकाई, कंपनी, साझेदारी या एकल स्वामित्व वाली फर्म के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसे सार्वजनिक परीक्षा के संचालन के लिए सार्वजनिक परीक्षा प्राधिकरण द्वारा नियुक्त किया गया हो.” आगे क्या होगा कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं की सुरक्षा बढ़ाने और परीक्षा केंद्रों पर आईटी बुनियादी ढांचे और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के लिए प्रोटोकॉल विकसित करने की योजना है और इसके लिए एक राष्ट्रीय तकनीकी समिति की स्थापना की जाएगी. ये कानून किस परीक्षाओं को कवर करेगा ये कानून केंद्र सरकार की प्रमुख परीक्षाओं जैसे यूपीएससी, एसएससी, रेलवे भर्ती, बैंकिंग परीक्षा और जेईई, एनईईटी, सीयूईटी जैसी सभी एनटीए कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं को कवर करता है. छात्रों और उम्मीदवारों पर कड़ी कार्रवाई नहीं ये कानून मामूली नकल और चीटिंग के लिए छात्रों और उम्मीदवारों पर सीधे दंड नहीं लगाता है, उनकी सज़ा को परीक्षा अधिकारियों के विवेक पर छोड़ देता है. हालाकि इस लचीलेपन का विरोध भी हुआ है. आलोचकों का तर्क है कि इससे कानून का असर कम हो सकता है. विदेश में क्या होता है विदेशों में भी परीक्षा में नकल कराने पर कड़ी सजा दी जाती है. चीन में भी नकल को कानूनी तौर पर अपराध माना जाता है. यदि कोई परिक्षार्थी नकल करता पाया गया तो उसे 7 सालों के लिए जेल की सजा हो सकती है. Tags: NEET, Neet exam, Paper Leak, UgcFIRST PUBLISHED : June 24, 2024, 18:58 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed