लकड़ी का चकरा और लोहे का कराहा ऐसे बनता है शुद्ध देसी गुड़ सुल्तानपुर में आज भी जिंदा है परंपरा

Traditional method of making jaggery: लकड़ी का चकरा लोहे का कराहा और जलती आग पर पकता गन्ने का रस. यह देसी गुड़ बनाने की परंपरागत प्रक्रिया आज भी सुल्तानपुर जिले के कुंदा भैरोंपुर गांव में जीवित है. यहां के किसान सोभनाथ जगत नारायण पाठक वर्षों से देसी तरीके से गुड़ बना रहे है. पहले बैलों से चलने वाली चरखी अब मोटर से चलती है. जिससे गन्ने का रस निकालकर लोहे के कराहे में पकाया जाता है. रस पकने पर ऊपर आने वाला मावा अलग कर दिया जाता है. ताकि गुड़ शुद्ध बने. सफाई के लिए भिंडी से बना लिक्विड भी मिलाया जाता है. रस गाढ़ा होने पर उसे लकड़ी के चकरे में चलाकर ठंडा किया जाता है. ठंडा होने पर गुड़ की भेली और ढली बनाकर पैक किया जाता है. इससे किसानों को अच्छा मुनाफा भी हो रहा है.

लकड़ी का चकरा और लोहे का कराहा ऐसे बनता है शुद्ध देसी गुड़ सुल्तानपुर में आज भी जिंदा है परंपरा