जहां रासायनिक खाद फेल वहां मुर्गी बीट ने दिखाया कमाल मिट्टी में लौटाई जान

छत्तीसगढ़ में बढ़ती खेती लागत के बीच किसान घनश्याम रात्रे ने मुर्गी पालन और खेती को जोड़कर सफल मॉडल बनाया है. वे बताते हैं कि पोल्ट्री फार्म की भूंसी में मिला मुर्गियों का बीट बेहतरीन जैविक खाद बनता है. यह खाद यूरिया-डीएपी से ज्यादा असरदार होकर उत्पादन बढ़ाती और मिट्टी को भुरभुरा बनाती है. नियमित उपयोग से खेतों में केंचुए बढ़ते हैं, जिससे उर्वरता सुधरती है. धान, सब्जी और फलदार फसलों में इसका अच्छा परिणाम मिलता है. हालांकि, अधिक प्रभावी होने के कारण इसे सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए.

जहां रासायनिक खाद फेल वहां मुर्गी बीट ने दिखाया कमाल मिट्टी में लौटाई जान