मिट्टी की खुशबू और सत्तू का स्वादबलिया की पहचान बना लिट्टी-चोखा
मिट्टी की खुशबू और सत्तू का स्वादबलिया की पहचान बना लिट्टी-चोखा
Litti Chokha: बलिया का लिट्टी-चोखा सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि जनपद की पहचान और परंपरा का प्रतीक है. मिट्टी की खुशबू, देसी स्वाद और सत्तू की खुशबू इसे खास बनाती है. बलिया के सलेमपुर गांव के बुजुर्ग राजेंद्र प्रसाद शर्मा के अनुसार, असली लिट्टी-चोखा चने के सत्तू, बारीक कटा लहसुन, नमक, तीखी मिर्ची का अचार, सरसों का तेल और अजवाइन या मंगरैला से तैयार किया जाता है. गेहूं के आटे में सत्तू भरकर लोई बनाई जाती है और गाय के उपलों की धीमी आंच पर सुनहरा होने तक पकाया जाता है. साथ ही आलू, बैंगन और टमाटर भूनकर नमक, सरसों का तेल, लहसुन और नींबू डालकर मसलने पर बनता है ताजा चोखा, जिस पर हरा धनिया डालते ही इसका रंग और खुशबू मनमोहक बन जाती है. सर्दियों की शाम में गरम लिट्टी-चोखा थाली में आने पर ठंड दूर भाग जाती है, और पेट व दिल दोनों को तृप्त करता है. बीपी यादव बताते हैं कि सत्तू प्रोटीन से भरपूर होने के साथ यह देसी व्यंजन स्वाद और ऊर्जा दोनों का अद्भुत संगम है. सरकार ने इसे ODOP योजना में भी शामिल किया है, जिससे बलिया की परंपरा और स्वाद देश-दुनिया में प्रसिद्ध हो रहा है.