आयुर्वेद में निर्गुंडी के दातुन करने से दांत और मुंह के कई रोग गायब! पत्तियों के रस का फायदा जान हो जाएंगे हैरान

बलिया जिले के बांसडीह रोड थाना क्षेत्र अंतर्गत मझौली में स्थित शांति आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. सरत कुमार पाणिग्रही ने कहा कि, वह उड़ीसा के रहने वाले हैं, जो सरकारी नौकरी से रिटायर्ड होकर UP के बलिया में सेवा दे रहे हैं. निर्गुंडी का पौधा धूप में अच्छे से पनपता है. लेकिन इसके लिए उपजाऊ, जल निकासी वाली मिट्टी की जरूरत होती है. अधिक पानी इसकी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए संतुलित नमी जरूरी होती हैं, ऐसा करने से पौधा हराभरा होता हैं और तेजी से ग्रोथ करता हैं.

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