नक्सलवाद की तर्ज पर जंग जरूरी: पंजाब चुनाव में फिर गूंजने लगा नशे का पुराना राग सीमा पार साजिश का बहाना कब तक

पंजाब में चुनावी बिसात बिछते ही सियासतदानों ने एक बार फिर नशे को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया है. पांच साल पहले सत्ता में आने वालों ने महज छह महीने में इस दीमक को जड़ से मिटाने की कसमें खाई थीं. वक्त बीत गया, लेकिन सूबे के गांव, कस्बे और नौजवान आज भी उसी भयानक दलदल में धंसते जा रहे हैं. चुनावी मौसम लौटते ही नेता अपनी नाकामी छुपाने के लिए सीमा पार की साजिशों का बहाना तलाशने लगे हैं.

नक्सलवाद की तर्ज पर जंग जरूरी: पंजाब चुनाव में फिर गूंजने लगा नशे का पुराना राग सीमा पार साजिश का बहाना कब तक