Dharohar: कुतुब शाही दौर के दो सूफी संतों के मकबरे बदहाल टूट रहे गुंबद और मिट रहे निशान
Dharohar: कुतुब शाही दौर के दो सूफी संतों के मकबरे बदहाल टूट रहे गुंबद और मिट रहे निशान
Hyderabad Historical Heritage: चारमीनार और गोलकुंडा किले के लिए मशहूर हैदराबाद में ऐतिहासिक विरासत का एक ऐसा हिस्सा भी है, जो धीरे-धीरे बदहाली की ओर बढ़ रहा है. बालापुर के रौशन-उद-दौला इलाके में भाले शाह और भोले शाह नामक कुतुब शाही दौर के सूफी संतों के मकबरे मौजूद हैं. इतिहासकारों के अनुसार दोनों संतों ने शाही कब्रिस्तानों से दूर इस शांत इलाके में दफन होना पसंद किया था. सदियों पुराने इन मकबरों में दकनी वास्तुकला, आकर्षक मेहराब, गुंबद और प्लास्टर नक्काशी देखने को मिलती है. लेकिन लंबे समय से संरक्षण और देखरेख नहीं होने के कारण इनकी हालत खराब हो चुकी है. मकबरों में तोड़फोड़ के निशान हैं, मूल कब्रों के हेडस्टोन क्षतिग्रस्त हैं और गुंबदों पर वनस्पति उग आई है. स्थानीय लोगों ने पुरातत्व विभाग और वक्फ बोर्ड से संरक्षण की मांग की है.