दीपू के लिए तो मोमबत्ती तक नहीं जलाई वहीं उमर के लिए ममदानी मांग रहे रिहाई
बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की मॉब लिंचिंग पर अंतरराष्ट्रीय चुप्पी और भारत में उमर खालिद की रिहाई के लिए अमेरिकी सांसदों की सक्रियता मानवाधिकार संगठनों की दोहरी नीति और पूर्वाग्रह को उजागर करती है.