जहां हर हथौड़े की चोट सुनाती है इतिहास जयपुर का ठठेरों का रास्ता बना विरासत की पहचान
जहां हर हथौड़े की चोट सुनाती है इतिहास जयपुर का ठठेरों का रास्ता बना विरासत की पहचान
जयपुर के ऐतिहासिक चारदीवारी क्षेत्र में स्थित ठठेरों का रास्ता आज भी सदियों पुरानी ठठेरा कला की जीवंत पहचान बना हुआ है. यहां के कारीगर पीढ़ी दर पीढ़ी तांबा, पीतल और कांसे के बर्तन तथा धार्मिक और सजावटी सामान हाथों से तैयार कर रहे हैं. महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय के समय बसाए गए इन कारीगरों ने करीब 150 वर्षों से इस परंपरा को संजोकर रखा है. हालांकि मशीनीकरण और घटती मांग के कारण इस कला से जुड़े कारीगरों की संख्या लगातार कम हो रही है, फिर भी कई परिवार अपनी विरासत और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए इस पारंपरिक हुनर को जीवित रखे हुए हैं.