रूस-यूक्रेन के बीच 6 महीने के युद्ध ने दुनिया को कैसे और कितना प्रभावित किया सबसे ज्यादा नुकसान किसको

युद्ध ने दुनिया को और दयनीय स्थिति में पहुंचा दिया है. महंगाई, कम विकास, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की कम क्षमता और अधिक राजनीतिक अस्थिरता ने संकट को और बढ़ाया है. इस युद्ध का दुनिया पर चौतरफा असर हुआ.

रूस-यूक्रेन के बीच 6 महीने के युद्ध ने दुनिया को कैसे और कितना प्रभावित किया सबसे ज्यादा नुकसान किसको
हाइलाइट्सयुद्ध की वजह से विकासशील दुनिया के अधिकांश हिस्सों में अत्यधिक राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई है. महंगाई रोकने को केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कई बार बढ़ोतरी की. श्रीलंका ने एक बड़ा विद्रोह देखा जिसने शक्तिशाली राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को उखाड़ फेंका. नई दिल्ली. रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के लगभग छह महीने बीत गए हैं. रूस पर पश्चिम ने उसके तेल, गैस, भोजन और उर्वरक के निर्यात पर अंकुश लगाया हुआ. दुनिया महंगाई, कम विकास, जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करने की कम क्षमता और अधिक राजनीतिक अस्थिरता के साथ और ज्यादा दयनीय स्थिति में पहुंच गई है. इस युद्ध का दुनिया पर चौतरफा असर हुआ. जिस तरह हर देश का दुख एक समान नहीं होता उसी तरह इस युद्ध से कुछ अधिक पीड़ित हैं, कुछ कम और कुछ बहुत कम. इस युद्ध से अमीर दुनिया की तुलना में अधिक महंगाई के साथ विकासशील दुनिया को निश्चित रूप से एक बुरा सौदा मिला है. कुल मिलाकर, उनकी मुद्राओं का अधिक मूल्यह्रास हुआ है. ऊर्जा के लिए उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ रही है. कम स्थानीय मुद्राएं और विश्व स्तर पर अधिक महंगी ऊर्जा व भोजन ने एक साथ उच्च ब्याज दरों को जन्म दिया है. सिवाय तुर्की के, जहां राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन का मानना है कि वह अर्थशास्त्र के नियमों को उलट सकते हैं. यह भी पढ़ें- भारत के आर्थिक विकास के लिए क्या है सबसे बड़ा खतरा, क्या कहा आरबीआई एमपीसी मेंबर ने? युद्ध की वजह से दुनियाभर में महंगाई बढ़ी जिसको रोकने के लिए केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों में कई बार बढ़ोतरी की. उच्च ब्याज दरें विकासशील देशों के विकास में बाधा डालती हैं. इसका भी नुकसान गरीब और विकासशील देशों को झेलना पड़ रहा है. राजनीतिक अस्थिरता पैदा हुई वहीं दूसरी तरफ, महंगाई, कम विकास, खराब शासन और भ्रष्टाचार पर लोगों के गुस्से ने विकासशील दुनिया के अधिकांश हिस्सों में अत्यधिक राजनीतिक अस्थिरता पैदा कर दी है. श्रीलंका ने एक बड़ा विद्रोह देखा जिसने शक्तिशाली राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को उखाड़ फेंका. पाकिस्तान में, सहयोगी दलों के बीच सेना-सहायता प्राप्त असंतोष ने इमरान खान की सरकार को बाहर का रास्ता दिखाया. सोमालिया, माले और मोजाम्बिक में इस्लामी उग्रवाद का स्तर और अधिक हुआ है. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य आंतरिक संघर्ष के एक बड़े स्तर से ग्रस्त है. डाकुओं और अपहरणकर्ताओं के गिरोह ने नाइजीरिया के बड़े इलाकों पर अपनी पकड़ बढ़ा ली है. आर्थिक तंगी ने दक्षिण अफ्रीका के भ्रष्ट पूर्व राष्ट्रपति जैकब जुमा को उनकी गिरफ्तारी का संकट खड़ा करने में मदद की. लेबनान, मिस्र, सोमालिया और इथियोपिया के टाइग्रे क्षेत्र में गेहूं की भारी कमी देखी जा रही है, क्योंकि वे यूक्रेन और रूस से आयात पर निर्भर हैं. सरकारों के खिलाफ गुस्सा बढ़ा अधिकांश लैटिन अमेरिका ने वामपंथियों के झुकाव के साथ शासन परिवर्तन देखा है. कोलंबिया हाल ही में मेक्सिको, अर्जेंटीना, चिली, पेरू, बोलीविया, वेनेज़ुएला और क्यूबा की कतार में शामिल हो गया है. ब्राजील में भी भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है. यह भी पढ़ें- बिना इनकम टैक्स रिटर्न भरे क्या होम लोन मिल सकता है? जानिए इस सवाल का जवाब अमीर देशों को कम नुकसान उत्तरी अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे धनी देश विकासशील या गरीब देशों जितने समान रूप से पीड़ित नहीं है. जैसे जापान सबसे कम प्रभावित है. लगभग 20 प्रतिशत की मुद्रा में गिरावट के बावजूद, मुद्रास्फीति 2.3 प्रतिशत है. बेरोजगारी 2.6 प्रतिशत है और नीतिगत दरें शून्य हैं. चालू खाता सकारात्मक है. 1990 के बाद के जापानी मानकों के अनुसार अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. यूरोप में संकट ज्यादा यूरोप में खाद्य और ऊर्जा की ऊंची कीमतों और बढ़ती बेरोजगारी से भी बदतर समस्याएं हैं. इटली सत्ता के लिए एक फासीवादी पार्टी का चुनाव करने की कगार पर है, जो फ्रांस और जर्मनी के साथ जुड़ा हुआ है. यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित अमीर दुनिया में यूरोप सबसे ऊपर है. यहां भोजन और ऊर्जा की कीमतों में बहुत अधिक वृद्धि, उच्च बेरोजगारी दर एक बड़ा संकट है. द इकोनॉमिस्ट ने शोध का हवाला देते हुए कहा कि 2020 की तुलना में यूनाइटेड किंगडम में ऊर्जा की कीमतों में लगभग चौगुनी वृद्धि हुई है. जर्मन गैस की कमी के लिए अभी से ही सर्दी के लिए कमर कस रहे हैं. सस्ते रूसी गैस पर निर्भर रहने के आदी औद्योगिक संयंत्रों में आंशिक रूप से बंदी और बिजली की कीमतों में वृद्धि देखने को मिल रही. कुल मिलाकर इस युद्ध से ने महामारी से कमजोर दुनिया को और ज्यादा कमजोर किया है. अब आगे युद्ध की ओर जाता और इसका कितनी व्यापक असर होगी रिसर्च का विषय होगा. ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें up24x7news.com हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट up24x7news.com हिंदी | Tags: Russia, Russia ukraine war, WarFIRST PUBLISHED : August 25, 2022, 07:40 IST