रुपयों में बढ़ रहा है विकास लेकिन डॉलर में क्यों पिछड़ रहे हैं हम आखिर डॉलर क्यों है जरूरी
रुपयों में बढ़ रहा है विकास लेकिन डॉलर में क्यों पिछड़ रहे हैं हम आखिर डॉलर क्यों है जरूरी
भारत की विकास दर को लेकर विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के अनुमान सामने आए हैं. एनएसओ (NSO) के मुताबिक देश की विकास दर 7.4% रहने की संभावना है. इसी तरह, मूडीज़ और IMF ने इसे 7.3%, वर्ल्ड बैंक और एशियन डेवलपमेंट बैंक ने इसे 7.2% तक बताया है. अगर इन सभी का औसत निकाला जाए तो भारत की विकास दर लगभग 7.3% के आसपास है. विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि यह दर अच्छी मानी जाती है, लेकिन दुनिया के मुकाबले इसमें तेजी की जरूरत है. क्योंकि डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में वृद्धि उतनी प्रभावशाली नहीं है। उदाहरण के लिए, अगर विकास दर 7–7.5% रही भी, तो डॉलर टर्म्स में यह केवल 1.5% की बढ़ोतरी के बराबर है. विश्लेषकों के अनुसार, यदि भारत विश्व स्तर पर चौथे या तीसरे स्थान पर अपनी अर्थव्यवस्था को और मजबूती से रखना चाहता है, तो डॉलर में भी वास्तविक विकास तेज होना चाहिए. इसका मतलब है कि केवल रुपये में विकास काफी नहीं है, बल्कि वैश्विक मुद्रा में प्रतिस्पर्धात्मक वृद्धि जरूरी है.