समुद्र खुद करता है भोलेनाथ का अभिषेक दिन में दो बार गायब हो जाता है 4 फीट ऊंचा शिवलिंग जानिए रहस्य

भारत में हजारों ऐसे अद्भुत मंदिर हैं जिनका इतिहास हैरान कर देता है. हर मंदिर का अपना पौराणिक महत्व है. लेकिन भगवान शंकर का एक मंदिर इतना अनोखा है जो दिन में दो बार समुद्र में डूब जाता है. यह महादेव का स्तंभेश्वर मंदिर है. यह गुजरात के भरूच में अरब सागर और खंभात की खाड़ी के बीच मौजूद है. इस मंदिर में भगवान शंकर का करीब 4 फीट ऊंचा शिवलिंग स्थापित है. महादेव का यह चमत्कारिक मंदिर दिन में दो बार समुद्र के पानी में पूरी तरह डूब जाता है. इसके पीछे की वजह समुद्र में आने वाला हाई टाइड या ज्वार भाटा है. जब हाई टाइड आता है तो मंदिर पानी में समा जाता है. पानी का स्तर नीचे आने पर मंदिर फिर से दिखने लगता है. पानी कम होते समय ऐसा लगता है जैसे खुद भगवान शिव समुद्र से बाहर आ रहे हैं. स्थानीय लोग मानते हैं कि समुद्र खुद भगवान शिव का अभिषेक करने आता है.स्तंभेश्वर मंदिर के निर्माण का जिक्र स्कंद पुराण में भी मिलता है. पुराण के अनुसार भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने ताड़कासुर राक्षस का वध किया था. ताड़कासुर भगवान शंकर का बहुत बड़ा भक्त था. ताड़कासुर के वध के बाद कार्तिकेय को भारी अपराध बोध हुआ. उन्हें लगा कि उन्होंने शिव जी के एक परम भक्त को मार दिया है. इसके बाद भगवान विष्णु के सुझाव पर कार्तिकेय ने प्रायश्चित का रास्ता चुना. उन्होंने ही यहां इस शिवलिंग की स्थापना की थी.कार्तिकेय द्वारा स्थापित इसी शिवलिंग को अब स्तंभेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता है. स्तंभेश्वर मंदिर को संगम गुप्त तीर्थ भी कहा जाता है. समुद्र में मंदिर के शिवलिंग के डूबने का नजारा बेहद खास होता है. इस प्राकृतिक अभिषेक को देखने के लिए यहां रोज हजारों भक्त आते हैं. यह मंदिर प्राकृति और आस्था का एक अद्भुत संगम है. लहरों के बीच शिव का यह रूप हर किसी को मंत्रमुग्ध कर देता है.

समुद्र खुद करता है भोलेनाथ का अभिषेक दिन में दो बार गायब हो जाता है 4 फीट ऊंचा शिवलिंग जानिए रहस्य