आजादी से ठीक पहले गांधी के मन में क्यों नहीं थी खुशी जोधपुर को बचाने में किसने बिगाड़ा जिन्ना का खेल
आजादी से ठीक पहले गांधी के मन में क्यों नहीं थी खुशी जोधपुर को बचाने में किसने बिगाड़ा जिन्ना का खेल
8 अगस्त 1947 को देश की आजादी में सिर्फ सात दिन बाकी थे, लेकिन महात्मा गांधी के मन में खुशी नहीं थी. लाहौर में हिंदू-सिख परिवारों की हिंसा और शरणार्थियों की बदहाली देखकर गांधी बेहद दुखी थे. दूसरी तरफ जिन्ना की नजर जोधपुर रियासत पर थी. उन्होंने महाराजा को पाकिस्तान के साथ जाने के लिए कई बड़े राजनीतिक और आर्थिक फायदे देने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन जोधपुर के दीवान वेंकटाचारी ने जिन्ना की इस चाल को नाकाम कर दिया. जानिए 8 अगस्त 1947 की पूरी कहानी.