अररिया में 200 साल पुरानी परंपरा आज भी जिंदा नदी पर लगता है दोस्ती का मेला
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, वर्ष 1780 से 1800 के बीच जब पहुंसरा क्षेत्र पर महारानी इंद्रावती का शासन था, तब वे अपने महल से चलकर फरियानी नदी के यामुन घाट पर स्नान और पूजा करने आती थीं. महारानी के साथ सार्वजनिक रूप से स्नान और पूजा करने के लिए पूरे इलाके की प्रजा उमड़ पड़ती थी.