म्यांमार के रास्ते घुसेंगे भारतीय टैंक रौंद देंगे चीन-बांग्लादेश की साजिश

KALADAN PROJECT: चीन की नजर अरुणाचल प्रदेश पर हमेशा से टेढ़ी रही है. उसे इस बात का एहसास है कि सिलिगुड़ी कॉरिडो भारत की एक कमजोर कड़ी है. चीन तो म्यांमार में बन रहे कालादान प्रोजेक्ट के खिलाफ था. उसे लगता था कि म्यामर के साथ रिश्तें भारत के बढ़े तो उसका बड़ा नुक्सान होगा. क्योकि वह खुद म्यांमार में तेल और गैस के पाईपलाइन का जाल बिछाना चाहता है ताकी समंदर में दूसरे देशो से तकरार के बाद भी उसके एनर्जी ट्रेड में कोई बाधा न आ सके. म्यांमार की उपयोगिता इसलिए भी चीन के लिए बढ जाती है क्योंकि भारत सरकार ने अपने पुराने लुक इस्ट पॉलिसी को एक्ट इस्ट पॉलिसी से तब्दील कर चुका है. म्यांमार चीन के लिए साउथ एशिया और साउथ इस्ट एशिया के मध्य में पड़ने वाला एक महत्वपूर्ण देश है. यह चीन के युन्नान स्टेट के सीधे हिंद महासागर तक अपनी पहुंच बनाना चाहता है. 2019 से 2030 तक के बीच चीन म्यांमार में आर्थिक सहयोग के तहत इंफ़्रास्ट्रक्चर, एग्रिकल्चर, ट्रांसपोर्ट, ह्यूमन रिसोर्सेज़, टैक्नॉलेजी और टैलिकॉम के क्षेत्र को बढ़ावा देना है. चीन के यूनान शहर से म्यांमार के दो बडे इकॉनोमिक सेंटर तक 1700 किलोमीटर का लंबा प्रोजेक्ट बनाया जाना है.

म्यांमार के रास्ते घुसेंगे भारतीय टैंक रौंद देंगे चीन-बांग्लादेश की साजिश