महराजगंजः सावन में बदल गया गांवों का नजारा नहीं रही पहले जैसी रौनक और झूले फीकी पड़ रहीं परंपराएं जानें
सावन के महीने में पहले जैसे ना तो खुशनुमा माहौल रहा और ना ही पुराने समय के जैसी लोगों के बीच समरसता रही है. आज से लगभग दस साल पहले की बात की जाए तो सावन के महीने ग्रामीणों क्षेत्रों में एक अलग तरह का रौनक देखने को मिलता था. सावन का महीना शुरू होते ही बेटियां अपने मायके आने की तैयारी करने लगती थी. मायके में आने के बाद अपने सखियों से मिलना और अपने पुराने यादों को ताजा करने में लग जाती थी. इसके साथ ही सावन का झूले का आनंद शायद ही कोई छोड़ता था.