साहस और बलिदान की मिसाल था बादल 1858 में किले से निकालकर बचाई थी लक्ष्मीबाई की जान आखिरी सांस तक निभाया फर्ज

History of Jhansi Fort: बादल अपनी तेज रफ्तार, समझदारी और बहादुरी के लिए जाना जाता था. युद्ध के मैदान में वह बिना डरे दुश्मनों के बीच दौड़ पड़ता था और महारानी को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में हमेशा सफल रहता था. स्थानीय लोगों और लोककथाओं में आज भी बादल की वफादारी के किस्से सुनाए जाते हैं. यही वजह है कि झांसी के इतिहास में बादल का नाम भी महारानी लक्ष्मीबाई के साथ सम्मान से लिया जाता है.

साहस और बलिदान की मिसाल था बादल 1858 में किले से निकालकर बचाई थी लक्ष्मीबाई की जान आखिरी सांस तक निभाया फर्ज