भागलपुर का कतरनी चूड़ा और चावल क्यों है खास वीडियो में देखें असली और मिलावटी की पहचान का तरीका
भागलपुर का कतरनी चूड़ा और चावल क्यों है खास वीडियो में देखें असली और मिलावटी की पहचान का तरीका
भागलपुर अपने बेहतरीन सिल्क, जर्दालु आम, केला और लीची के लिए तो जाना ही जाता है. इसके साथ ही अब यह अपने बेहतरीन कतरनी के लिए भी पहचाना जाता है. यहां के कतरनी चूड़ा और कतरनी चावल की वैश्विक स्तर पर पहचान है. दही-चूड़ा बिहार में काफी ज्यादा पसंद किया जाता है. दही में जब कतरनी चूड़ा मिलाकर खाया जाता है तो उसका स्वाद और ही बढ़ जाता है. थाली में कतरनी चावल आ जाए तो खाने का आनंद बढ़ जाता है. कतरनी अपनी खुश्बू के लिए काफी प्रसिद्ध है. इसके खासियत की बात करें तो कतरनी धान की खेती करने वाले भागलपुर के एक किसान मनीष सिंह ने बताया कि यहां का कतरनी धान बिल्कुल ही अलग होता है. इससे जो चूड़ा तैयार होता है उसमें अलग खुशबू होती है. बताया जाता है कि भागलपुर की कतरनी बाकी कतरनी से इसलिए भी अलग है कि बारिश के मौसम में यहां पहाड़ों से जो पानी उतरता है उसके साथ जो मिट्टी बहकर आती है वो अलग ही खुशबू लेकर आती है. यही वजह है कि यहां की कतरनी अलग है. उन्होंने बताया कि कतरनी की उपज तो कहीं भी हो सकती है लेकिन, ये खुशबू सभी जगह की कतरनी में नहीं मिलेगी. भागलपुर के कतरनी चावल को जीआई भी मिला है. आपको बता दें कि कतरनी चूड़ा की पहचान आसान नहीं है क्योंकि मालभोग, कतरनी और सोनम का चूड़ा देखने में एक जैसा लगता है. अगर कतरनी में सोनम को मिक्स कर दिया गया....