साल 1932 से स्वदेशी की पहचान गांधी जी की प्रेरणा से जन्मा रत्नम पेन 94 साल से जिंदा है स्वदेशी की विरासत
महात्मा गांधी की प्रेरणा से शुरू हुआ राजमंड्री का रत्नम पेन वर्क्स आज भी पूरी तरह हस्तनिर्मित स्वदेशी फाउंटेन पेन बनाकर आत्मनिर्भर भारत की विरासत को जीवित रखे हुए है. 1935 में गांधी जी ने इसकी गुणवत्ता की सराहना करते हुए इसे विदेशी पेन का बेहतरीन विकल्प बताया था. आज भी यह ऐतिहासिक प्रतिष्ठान अपनी पारंपरिक शिल्पकला और उत्कृष्ट गुणवत्ता के लिए देश-दुनिया में पहचान बनाए हुए है.