बागेश्वरः बर्फबारी भूकंप के बाद भी 100 साल मजबूती खड़े रहते हैं पहाड़ के मकान बिना सीमेंट के होता है निर्माण जानें मजबूती का राज जानें
पारंपरिक पहाड़ी मकानों की एक बड़ी खासियत उनकी ढलानदार छत होती थी. छतों पर स्लेट या पत्थर की पट्टियां लगाई जाती थीं. पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी को देखते हुए छत को ढलानदार बनाया जाता था. ताकि पानी और बर्फ ज्यादा देर तक जमा न रहे. इससे मकान की दीवारों और छत पर नमी का असर कम होता था. मकान बनाते समय नींव और आसपास की जल निकासी पर भी विशेष ध्यान दिया जाता था.