मधुबनी के घूरन ठाकुर 30 साल से बना रहे सरौता अमेरिका के म्यूजियम तक पहुंची कारीगरी

Madhubani News: लोहे की वस्तु बनाना घूरन ठाकुर के लिए सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि पैतृक विरासत है. उनके पूर्वज भी यही काम करते थे. उसी समय से यह छोटी सी बिना नाम की दुकान मशहूर है. जहां बिना किसी तामझाम के एक छोटे से कमरे में काम होता है. पीतल और लोहे से बनी उनकी कलाकृतियां और मजबूती ऐसी है कि दूर-दूर के पानवाले इसे सुपारी काटने के लिए खरीदकर ले जाते है.

मधुबनी के घूरन ठाकुर 30 साल से बना रहे सरौता अमेरिका के म्यूजियम तक पहुंची कारीगरी