दोनों किडनियां खराब फिर भी नहीं टूटा हौसलासावन में कांवड़ियों का बना फरिश्ता

सावन के पावन महीने में जहां हजारों श्रद्धालु कांवड़ यात्रा पर निकल रहे हैं, वहीं राजस्थान के परबतसर क्षेत्र के ढाढ़ोता गांव के 29 वर्षीय सुखाराम सारण अपनी गंभीर बीमारी के बावजूद सेवा का अनूठा उदाहरण पेश कर रहे हैं. दोनों किडनियां खराब होने के कारण वे लंबे समय से डायलिसिस पर हैं, लेकिन इसके बावजूद कांवड़ियों को निशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध करा रहे हैं. पैदल यात्रा के दौरान घायल, थके या अस्वस्थ श्रद्धालुओं की वे बिना किसी शुल्क के मदद करते हैं. सुखाराम की यह प्रेरणादायक कहानी बताती है कि सच्ची सेवा के लिए धन नहीं, बल्कि संवेदनशील मन और मजबूत हौसले की जरूरत होती है.

दोनों किडनियां खराब फिर भी नहीं टूटा हौसलासावन में कांवड़ियों का बना फरिश्ता