रेगिस्तान का अनोखा ‘मौसम अलार्म’! ऊंटनी के बैठते-पैर पटकते ही बारिश की दस्तक लोकज्ञान ने फिर चौंकाया विज्ञान
रेगिस्तान का अनोखा ‘मौसम अलार्म’! ऊंटनी के बैठते-पैर पटकते ही बारिश की दस्तक लोकज्ञान ने फिर चौंकाया विज्ञान
Bikaner News Hindi : राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में मौसम का अंदाज़ा लगाने का एक अनोखा देसी तरीका आज भी जीवित है - ऊंटनी का व्यवहार. आधुनिक सैटेलाइट और मौसम विभाग की भविष्यवाणियों के बीच ग्रामीण आज भी पशुओं के संकेतों पर भरोसा करते हैं. लोक मान्यता है कि जब ऊंटनी जमीन पर बैठकर पैरों को बार-बार हिलाने लगे या असहज दिखे, तो बारिश नज़दीक होती है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जानवर वातावरण में नमी, तापमान और वायुदाब के बदलाव को इंसानों से पहले महसूस कर लेते हैं, जिससे यह परंपरा अनुभवजन्य ज्ञान का मजबूत उदाहरण बन गई है.