हिजाब मामला: कर्नाटक HC के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर 2 बजे SC में सुनवाई

आज सुबह जब सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील दुष्यंत दवे ने मांग कि मामले की सुनवाई किसी और दिन हो, क्योंकि वह अपनी बुक लेकर नहीं आए हैं. कर्नाटक सरकार की ओर से पेश साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं यह पहली बार सुन रहा हूं कि किसी काउंसल के पास बुक नहीं है.

हिजाब मामला: कर्नाटक HC के फैसले के खिलाफ याचिकाओं पर 2 बजे SC में सुनवाई
नई दिल्लीः शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पर प्रतिबंध को बरकरार रखने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ विभिन्न याचिकाओं पर आज दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. आज सुबह जब सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ताओं में से एक के वकील दुष्यंत दवे ने मांग कि मामले की सुनवाई किसी और दिन हो, क्योंकि वह अपनी बुक लेकर नहीं आए हैं. कर्नाटक सरकार की ओर से पेश साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मैं यह पहली बार सुन रहा हूं कि किसी काउंसल के पास बुक नहीं है.सुप्रीम कोर्ट में भीड़ होने की वजह से जज ने डेढ़ बजे सुनवाई की बात कही तो, वकील राजीव धवन ने कहा कि कल क्यों न सुनवाई हो. एक अन्य याचिकाकर्ता के वकील देवदत्त कामत ने कहा, राज्य इस मामले में जवाब दाखिल नहीं कर रहा है, केस को खींच रहे हैं. वकील राजीव धवन ने कहा कि अभी कोर्ट में बहुत भीड़ है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि हम दोपहर 1ः30 बजे दोनों पक्षों की दलीलें सुन लेंगे. वकील देवदत्त कामत ने कहा कि कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश उचित नहीं है. वकील संजय हेगड़े ने कहा कि इस मामले की सुनवाई शुरुआती पहलुओं पर होनी चाहिए. यह बहुत गंभीर मामला है. बेंच ने कहा कि पहले शुरुआत तो हो, सभी याचिकाकर्ताओं के वकील आपस में तय कर लें कि पहले कौन दलील देगा? वकील संजय हेगडे ने कहा कि मामला मेरे गृह राज्य में शुरू हुआ. मैं ब्रीफ कर दूंगा कि कैसे मामला शुरू हुआ. सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, ठीक है, हम दोपहर 2 बजे से सुनवाई करेंगे. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने हिजाब विवाद पर क्या फैसला दिया था? मुख्य न्यायाधीश रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता वाली कर्नाटक उच्च न्यायालय की 3 न्यायाधीशों की पीठ ने माना था कि कुरान मुस्लिम महिलाओं के लिए हिजाब पहनना अनिवार्य नहीं करता है. पीठ ने कहा था कि यह पोशाक मुस्लिम महिलाओं के लिए ‘सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच’ प्राप्त करने का एक साधन है, ‘सामाजिक सुरक्षा’ का एक उपाय है. लेकिन ‘हिजाब पहनना इस्लाम में एक धार्मिक अनिवार्यता’ नहीं है. उच्च न्यायालय ने कर्नाटक में हिजाब विवाद को भड़काने की त्वरित और प्रभावी जांच का भी समर्थन किया था, जिसमें संदेह था कि कुछ संगठन राज्य में ‘सामाजिक अशांति और असामंजस्य’ फैलाने के लिए इस मुद्दे को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं. कुछ छात्राओं के एक समूह द्वारा हिजाब पहनने को संविधान के तहत संरक्षित धार्मिक अधिकार बताकर दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए, उच्च न्यायालय ने कर्नाटक शिक्षा अधिनियम के तहत शैक्षणिक संस्थानों में यूनिफाॅर्म निर्धारित करने के राज्य सरकार के अधिकार को बरकरार रखा था. कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि शिक्षण संस्थाओं की ओर से निर्धारित ड्रेस कोड का पालन सभी छात्र-छात्राओं के लिए अनिवार्य है. इस आदेश के खिलाफ निबा नाज ने सुप्रीम कोर्ट में एक अपील दायर की, जिसमें तर्क दिया गया कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने ‘धर्म की स्वतंत्रता’ और ‘विवेक की स्वतंत्रता’ का एक द्वैतवाद बनाने में गलती की, जिसमें अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि धर्म का पालन करने वालों को ‘विवेक का अधिकार’ नहीं हो सकता है. पूर्व CJI ने हिजाब विवाद के मुद्दे पर तत्काल सुनवाई में नहीं ली दिलचस्पी एक अन्य याचिकाकर्ता ऐशत शिफा ने भी उच्च न्यायालय के फैसले के एक दिन बाद उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की. उडुपी में पीयू कॉलेज (हिजाब पहनने की मांग के मूल विरोध का केंद्र) की छात्राओं द्वारा 16 मार्च को दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए उनके वकील देवदत्त कामत द्वारा उल्लेख किया गया था. शीर्ष अदालत ने कहा था कि वह इन याचिकाओं पर गौर करेगी, लेकिन मामले में सुनवाई के लिए कोई तारीख निर्धारित नहीं किया. याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मार्च और जुलाई के बीच कई बार पूर्व सीजेआई एनवी रमण से मामलों को सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें up24x7news.com हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट up24x7news.com हिंदी | Tags: Hijab controversy, Karnataka High Court, Supreme CourtFIRST PUBLISHED : September 05, 2022, 13:04 IST