श्रद्धा मर्डर केस: आफताब का नार्को टेस्ट की मांग क्यों हुई ट्रुथ सीरम से क्या चाहती है दिल्ली पुलिस
श्रद्धा मर्डर केस: आफताब का नार्को टेस्ट की मांग क्यों हुई ट्रुथ सीरम से क्या चाहती है दिल्ली पुलिस
श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Murder Case) के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला का नार्को टेस्ट (Narco test) होगा तो सच्चाई सामने आएगी. दिल्ली पुलिस के कुछ अफसर इस थ्योरी को मान रहे हैं. उनका कहना है कि टेस्ट के लिए कोर्ट में अर्जी लगा दी गई है. आखिर क्या है मामला और क्या होता है नार्को टेस्ट?
हाइलाइट्सश्रद्धा मर्डर केस में दिल्ली पुलिस नार्को टेस्ट कराना चाहती है आरोपी आफताब को बेहद शातिर मान रहे हैं पुलिस अफसर कहा- सच तक पहुंचने के लिए नार्को एनालिसिस टेस्ट जरूरी
नई दिल्ली. अब तक के सबसे खौफनाक श्रद्धा मर्डर केस (Shraddha Murder Case) के आरोपी आफताब अमीन पूनावाला को लेकर दिल्ली पुलिस (delhi police) के अफसर अब नार्को टेस्ट (Narco Test) की मांग कर रहे हैं. आफताब पूनावाला के नार्को टेस्ट की अर्जी साकेत कोर्ट में लगाई है. इस टेस्ट के लिए आरोपी की सहमति की जरूरत होती है. ये एक लंबा प्रोसेस है, जिसमें कई टेस्ट कराने होते हैं. पुलिस को अभी तक कोर्ट से इसकी लिखित इजाजत नहीं मिली है. दिल्ली पुलिस का कहना है कि आफताब की निशानदेही पर अभी वारदात में इस्तेमाल हथियार, श्रद्धा का फ़ोन, वारदात के वक़्त पहने गए कपड़े और कई अन्य चीजें बरामद करनी है, जिसके लिए उसकी रिमांड की जरूरत है.
पुलिस अफसरों का मानना है कि आफताब ने जिस तरीके से हत्या की, शव के कई टुकड़े किए, उन्हें फ्रिज में रखा और कई दिनों तक इन टुकड़ों को दिल्ली के कई हिस्सों में फेंक कर ठिकाने लगाया. इस बीच आफताब मुंबई अपने घर गया और उसने पुराना घर बदल लिया. वहीं हत्या के बाद उसने एक नई गर्ल फ्रेंड बनाई और उसे भी अपने उसी छतरपुर वाले फ्लैट पर बुलाया जहां शव रखा हुआ था. इन सबके बीच कई सवालों के जवाबों के लिए उसका नार्को टेस्ट कराना होगा. इस टेस्ट के बाद ही पर्दाफाश हो सकेगा.
बेहद शातिर है आफताब, उससे सच निकलवाने के लिए नार्को टेस्ट ही कारगर
पुलिस अधिकारी ने बताया कि आफताब बहुत ही शातिर है. उसने हत्या के बाद अपने कपड़े और श्रद्धा के कपड़ों को नष्ट कर दिया, बल्कि फर्श पर गिरे खून को भी एसिड से साफ किया था. ऐसे अपराधियों से सच निकालने के लिए नार्को टेस्ट ही जरूरी होता है. इसके लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी है. अभी तक कोर्ट ने नार्को टेस्ट की प्रार्थना मंजूर नहीं की है. उन्होंने बताया कि पुलिस ने अलग-अलग इलाकों से आफताब की निशानदेही पर कुछ सैंपल जमा किए हैं जिनका डीएनए एनालिसिस किया जाएगा. अब पुलिस उस डेटिंग एप बंबल से भी संपर्क कर सकती है, जिसके जरिए श्रद्धा और आफताब की मुलाकात हुई थी. पुलिस श्रद्धा के उस दोस्त लक्ष्मण से भी जांच में शामिल होने को कहेगी, जिसने श्रद्धा के पिता को सतर्क किया था. गौरतलब है कि आरोपी आफताब अमीन पूनावाला पर आरोप है कि उसने अपनी लिव इन प्रेमिका श्रद्धा की गला घोंटकर हत्या की और फिर उसके शव के 35 टुकड़े किए. दिल्ली के घर पर उसने इन टुकड़ों को फ्रिज में रखा और करीब 20 दिनों तक हर रोज कुछ टुकड़ों को शहर में इधर-उधर फेंक कर ठिकाने लगाया.
क्या होता है नार्को टेस्ट?
नार्को एनालिसिस टेस्ट को ट्रूथ टेस्ट भी कहते हैं जिसमें सोडियम पेंटोथल का इस्तेमाल किया जाता है. यह दवा किसी भी व्यक्ति की ऐसी अवस्था में ले जाती है, जहां वह स्वतंत्र रूप से बोल पाता है. ऐसा तब होता है जब दवा के सही डोज मिलने से व्यक्ति अपनी चेतना खो देता है और वह सम्मोहक अवस्था में चला जाता है. यह अवस्था में जब उससे सवाल किए जाते हैं तो वह सच बोलता है और ऐसी अवस्था में उससे वास्तविक प्रतिक्रिया मिलती है. हालांकि यह टेस्ट एक मनोवैज्ञानिक, जांच अधिकारी या फोरेंसिक विशेषज्ञ की उपस्थिति में ही किया जाता है. हालांकि जांच एजेंसियां सच उगलवाने के लिए थर्ड-डिग्री ट्रीटमेंट तक करती हैं.
नार्को टेस्ट कैसे किया जाता है?
कोर्ट की अनुमति के बाद जब नार्को टेस्ट होता है तब व्यक्ति का चिकित्सकीय रूप से फिट होना जरूरी होता है. डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, लिंग और उसकी मेडिकल फिटनेस को देखते हुए दवा का प्रयोग करते हैं. यह दवा हिप्नोटिक सोडियम पेंटोथल जिसे थियोपेंटोन कहा जाता है, का प्रयोग होता है. अनुभवी डॉक्टर की देखरेख में इस दवा को लगाया जाता है. इसका डोज सटीक नहीं हो तो व्यक्ति की मौत हो सकती है या फिर वह कोमा में जा सकता है. टेस्ट के दौरान कई प्रकार की बारीकियां और सावधानियां बरती जाती हैं. व्यक्ति को ऐसी कंडीशन में रखा जाता है जहां वह दवा के प्रभाव में जवाब दे सके.
क्या नार्को टेस्ट पूरी तरह से सटीक है?
नार्को एनालिसिस पूरी तरह से सटीक नहीं होता है. इस परीक्षण को जांच का एक अवैज्ञानिक तरीका माना जाता है. कुछ लोगों पर दवा का असर पूरी तरह नहीं होता और वे जांचकर्ताओं को गुमराह कर देते हैं. वहीं कुछ लोग दवा के प्रभाव में आने के बाद भी गलत जवाब देने लगते हैं, जिनका पूछे गए सवाल से कोई संबंध नहीं होता.
भारत में नार्को टेस्ट
रिपोर्ट में कहा गया है कि 2002 में गोधरा मामले में भारत में पहली बार नार्को एनालिसिस का इस्तेमाल किया गया था. अब्दुल करीम तेलगी का 2003 में तेलगी स्टांप पेपर घोटाले में परीक्षण किया गया था. हालांकि तेलगी के मामले में बहुत अधिक जानकारी प्राप्त हुई थी. तब सबूत के रूप में इसकी विश्वसनीयता के बारे में सवाल उठाए गए थे. कुख्यात निठारी सीरियल कांड के दो मुख्य संदिग्धों का भी गुजरात के गांधीनगर में परीक्षण किया गया था.
भारत में होते हैं सबसे ज्यादा नार्को टेस्ट
नार्को-एनालिसिस टेस्ट के विरोधियों का तर्क है कि विश्वसनीय स्रोत के रूप में इसके उपयोग को सही ठहराने के लिए अपर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण हैं. भारत को दुनिया की नार्को एनालिसिस राजधानी के रूप में जाना जाता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में सुरक्षा एजेंसियों की रुचि के बावजूद नार्को टेस्ट के परिणाम सटीक नहीं होते हैं, ऐसे में कई देशों ने इससे दूरी बना ली है.
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Tags: Delhi police, Shraddha murder caseFIRST PUBLISHED : November 16, 2022, 19:38 IST