सरगुजा में आज भी जिंदा है माठा बनाने की 10-20 साल पुरानी परंपरा लकड़ी की मथनी से तैयार होता है शुद्ध देसी माठा
सरगुजा में आज भी जिंदा है माठा बनाने की 10-20 साल पुरानी परंपरा लकड़ी की मथनी से तैयार होता है शुद्ध देसी माठा
रतन माझी बताते हैं कि मथनी लकड़ी के डंडे को काटकर बनाई जाती है, जिसके दोनों तरफ पैर होते हैं. यह मथनी आज के समय में बहुत कम मिलती है. रतन के अनुसार, यह विधि उन्हें उनके पूर्वजों ने सिखाई है. उनका कहना है कि लोहे का उपयोग करके हाथ से बनाया गया माठा सेहत और स्वाद दोनों के लिए अच्छा नहीं होता, जबकि मथनी से बने माठे का स्वाद बहुत अच्छा और स्वादिष्ट होता है.