कानपुर के नाना राव पार्क में 1857 की क्रांति का गवाह बूढ़ा बरगद 133 क्रांतिकारियों की फांसी और अंग्रेजों की क्रूरता की है कहानी

1857 की क्रांति ने जब पूरे उत्तर भारत को अपनी चपेट में लिया, तो कानपुर भी अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ उठ खड़ा हुआ. नाना साहब के नेतृत्व में क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को चुनौती दी. तात्या टोपे और अजीमुल्ला खान जैसे नाम भी इस संघर्ष से जुड़े रहे. कानपुर में विद्रोह बढ़ने के साथ अंग्रेजी सेना ने भी दमन तेज कर दिया. कानपुर की लड़ाई में अंग्रेजों को जब दोबारा नियंत्रण मिला तो बदले की कार्रवाई शुरू हुई. बड़ी संख्या में लोगों को पकड़ा गया.

कानपुर के नाना राव पार्क में 1857 की क्रांति का गवाह बूढ़ा बरगद 133 क्रांतिकारियों की फांसी और अंग्रेजों की क्रूरता की है कहानी