गोंडा की गिरिजा देवी पारंपरिक खेती छोड़ सांवा और रागी की खेती न पानी न खाद फिर भी बंपर पैदावार जानें
गोंडा की गिरिजा देवी पारंपरिक खेती छोड़ सांवा और रागी की खेती न पानी न खाद फिर भी बंपर पैदावार जानें
गोंडा की किसान गिरिजा देवी बताती हैं कि सांवा और रागी की खेती में बुवाई के बाद न तो अतिरिक्त सिंचाई की जरूरत पड़ती है और न ही रासायनिक खाद की. बरसात के पानी से ही फसल अच्छी तरह तैयार हो जाती है. बुवाई के करीब चार महीने बाद इसकी कटाई कर ली जाती है, जिससे कम लागत में अच्छा उत्पादन मिलता है. गिरिजा देवी बताती है कि रागी और सांवा दोनों ही मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं. इनमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में होता है, जबकि सावा भी स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है. यही कारण है कि आजकल लोग इन अनाजों से बने आटा, दलिया और अन्य खाद्य पदार्थों का अधिक उपयोग कर रहे हैं.