गरीब बच्चों के टीचर 15 सालों से बच्चों को मुफ्त पढ़ाकर संवार रहे हैं भविष्य

सुनील जोस 15 सालों से गरीब बच्चों को मुफ्त में पढ़ाते हैं. बच्चों को शिक्षा के साथ ही मुफ्त खाना भी देते हैं. सरकारी स्कूल तक पहुंचाने और लाने के लिए फ्री स्कूल वैन भी चलवाते हैं.

गरीब बच्चों के टीचर 15 सालों से बच्चों को मुफ्त पढ़ाकर संवार रहे हैं भविष्य
हमारी आंखों के सामने वंचित वर्ग के बच्चों की कई तस्वीरें हैं, जिनमें बच्चे को बाल मजदूरी करते हुए दिखते है. आर्थिक समस्याओं से जूझते बच्चे अपनी पारिवारिक स्थिति से जीत नहीं पाते और पढ़ाई छोड़कर काम करने में जुट जाते हैं. ऐसे दिहाड़ी मजदूरी करने वाले लोगों के गरीब, वंचित वर्ग के बच्चों के लिए ये शिक्षक मसीहा साबित हो रहा है. शिक्षकों के लिए कहा जाता है कि ‘शिक्षक स्वयं जलकर बच्चों का जीवन शिक्षा से रौशन करता है.’ सुनील ने इस बात को सही साबित कर दिखाया है. उन्होंने शुरुआत में 50 बच्चों को मुफ्त में पढ़ाने की पहल की और आज ये कारवां बढ़ता जा रहा है. अजमेर के रहने वाले सुनील जोस सालों से गरीब बच्चों को पढ़ाने में जुटे हुए हैं. इन बच्चों को शिक्षित कर उनका भविष्य संवार कर वह इन्हें एक बेहतर जिंदगी देना चाहते हैं. खुद पेशे से एक प्राइवेट शिक्षक हैं और शिक्षा देने के अपने उद्देश्य को उन्होंने पूरा करने के लिए ऐसा सराहनीय कदम उठाया है. उनकी इस पहल की शुरुआत से लेकर अब तक के सफर के बारे में जानने के लिए न्यूज़ 18 ने की सुनील जोस से खास बातचीत… गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाते हैं सुनील जोस. कैसे और कब की शुरुआत सुनील बताते हैं कि उनका बचपन से शिक्षक बनने का सपना था. जिसके चलते पढ़ाई के बाद उन्होंने टीचिंग को ही अपने प्रोफेसन के रूप में चुना. वह मैथ्स के टीचर बन गए. एक दिन के बारे में याद करते हुए बताते हैं कि पत्नी के साथ किसी होटल में खाना खाने गए थे. बाहर निकलते समय उन्हें होटल के पीछे से कुछ बच्चों की आवाज आ रही थी. यह वो जगह थी जहां होटल का वेस्ट रखा जाता था. वहां उन्होंने देखा कि आवारा पशुओं के बीच कुछ बच्चे वेस्ट में से खाना तलाश रहे थे. इस दृश्य ने उन्हें झकझोर कर रख दिया था. उसके बाद उन्होंने उन बच्चों को बुलाया और अपनी गाड़ी में बैठाकर उनके घर पहुंचे जहां जाकर उन बच्चों के परिवार वालों से उनका सरकारी स्कूल में एडमिशन कराने की बात रखी. कुछ दिन बाद सुनील ने उनका एडमिशन कराया जहां उन्हें शिक्षा के साथ एक वक्त का खाना मिलने लगा. फिर उन्होंने स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के दौरान देखा की सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब, वंचित वर्ग के बच्चे स्कूल तो जाते हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल के बच्चों की तरह घर पर पढ़ाई या कोचिंग जैसी सुविधा नहीं मिल पाती है. कुछ बच्चे आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते स्कूल छोड़ देते हैं. ऐसे में उन गरीब बच्चों की मदद करने के लिए फ्री में उन्हें पढ़ाने का विचार आया. लेकिन मैं आर्थिक रूप से इतना मजबूत नहीं था की एकदम से 40 से 50 बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा पाऊं. इसलिए सुनील ने बच्चों को स्कूल से आने के बाद पेड़ के नीचे बैठाकर ही फ्री में पढ़ाना शुरू कर दिया. वह अपनी सैलेरी का कुछ हिस्सा हर महीने उन बच्चों की पढ़ाई के लिए उपयोग में आने वाली चीजें जैसे – किताबें, कॉपी, पेन, पेंसिल आदि पर खर्च करने लग गए. वह बताते हैं कि पेड़ के नीचे बिना किसी छत या बिना किसी टीन के टुकड़े के खुले आसमान के नीचे बच्चों को कुछ घंटे पढ़ाया करते थे. बच्चों के लिए बस भी चलवाई सुनील कहते हैं कि बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ ही उन बच्चों को एक बार का भोजन भी मुहैया कराते थे. पैसों को कमी होने के कारण शुरूआत में काफी समस्याएं आती थीं. मौसम के कारण भी पढ़ाने में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपना काम जारी रखा. समय बीतने के बाद जब लोगों को यह बात पता चली की सुनील गरीब बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं. तो लोगों ने सुनील के काम की तारीफ तो की है साथ ही उनकी मदद करने के लिए भी आगे आए. लोगों ने अपने-अपने तरीके से सुनील की मदद की. किसी ने आर्थिक तौर पर मदद की तो किसी ने बच्चों को खाना खिलाने में मदद की. कुछ साथी शिक्षकों ने सुनील के साथ आकर बच्चों को फ्री में पढ़ाया भी. इसके बाद धीरे-धीरे ये कारवां बढ़ता गया. इसके साथ ही बच्चों को सरकारी स्कूल पहुंचाने और उन्हें स्कूल से लाने के लिए उन्होंने एक वैन भी चलवाई है. जो सुबह बच्चों को सरकारी स्कूल छोड़ने जाती है और शाम को लेकर आती है. 232 बच्चों को मुफ्त पढ़ाते और एक वक्त का खाना देते हैं. अब बच्चों के लिए खोल दिया इंस्टीट्यूट सुनील और उनकी पत्नी दोनों शिक्षक हैं. उनकी पत्नी सरकारी स्कूल में बच्चों को पढ़ाती हैं. दोनों पति-पत्नी और उनके कुछ साथियों की मदद से बच्चों को पढ़ाने के इस सपने को एक साकार रूप दे दिया है. जब लोग उनकी मदद करने लगे तो उन्होंने बच्चों को शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड़ी. सुनील अपनी प्राइवेट नौकरी करते हैं, जिससे वह कमा कर बच्चों की मदद करने में खर्च करते हैं. कुछ साथियों के साथ मिलकर ‘उड़ान सोसाइटी’ नाम की संस्था की स्थापना की. इसमें चैरिटी के माध्यम से पैसे इकट्ठे कर बच्चों को पढ़ाते हैं. अब उन्होंने एक इंस्टीट्यूट खोल दिया है जिसमें तकरीबन 232 बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं. इन बच्चों को एक समय का भोजन भी दिया जाता है. इसके साथ ही इन गरीब बच्चों की ड्रेस से लेकर पढ़ाई में लगने वाली स्टेशनरी का खर्च भी उठाते हैं. जिससे की गरीब मजदूरों के बच्चे अच्छे से पढ़कर अपना सुंदर भविष्य बना सकें. वह समय-समय पर बच्चों के साथ प्रोग्राम्स भी करते हैं, जैसे क्रिसमस का त्यौहार हो या रक्षाबंधन हो अपना सारा समय उन्हीं बच्चों के साथ गुजारते हैं. इसके साथ ही ऐसे बच्चे जो नीट, जेईई या फिर किसी और एक्साम की तैयारी करना चाहते हैं, लेकिन पर्याप्त पैसे न होने के कारण कोचिंग संस्थानों में दाखिला नहीं ले पाते हैं. उन्हें भी मुफ्त पढ़ाने का काम करते हैं. बड़ी सफलताएं मिलीं सुनील बताते हैं कि उनके पढ़ाए बच्चों ने उनका खूब नाम रौशन किया है. वह स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के अलावा कोचिंग भी पढ़ाते हैं, जिसमें उनके कुछ साथी अपना समय निकालकर बच्चों को कुछ घंटे पढ़ाते हैं और कुछ साथियों ने बच्चों को पढ़ाने की जगह भी मुहैया करवाई है. वह गरीब बच्चों को हर साल कोचिंग पढ़ाते हैं. साल 2016 में उनकी कोचिंग में पढ़ने वाले तीन बच्चों शिखा वर्मा, पूजा जटोलिया और अजय जटोलिया का चयन आईआईटी में हुआ था. जो सुनील के लिए बहुत गर्व की बात है. उनके पढ़ाए बच्चे जब सफलता के शिखर पर पहुंचते हैं, तो उन्हें अपना सपना साकार होता दिखाई देता है. इसी तरह साल 2018 में भी उनकी कोचिंग में पढ़ाए गए स्लम एरिया के बच्चों ने 10 वीं की परीक्षा में 80 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाकर उनकी मेहनत सफल कर दी थी. इन 6 बच्चों ने कक्षा 10 वीं में 80 से ज्यादा अंक प्राप्त करके बीते 12 सालों का रिकॉर्ड तोड़ा था. JEE और NEET की मुफ्त कोचिंग देते हैं. देते हैं ये मैसेज सुनील चाहते हैं कि देश और दुनिया का हर बच्चा जो भले किसी भी वर्ग का हो उसे शिक्षा जरूर मिलनी चाहिए. समाज में व्याप्त कई सारी बुराइयों का कारण अशिक्षा है, जिसकी वजह से कई सारी बुराइयां हमारे बीच में फैली हुई हैं. गरीब या वंचित वर्ग के बच्चे आर्थिक कमजोरी के कारण पढ़ नहीं पाते और पैसे कमाने के लालच में कई गलत काम करते हैं. कोई नशाखोरी में फंसकर रह जाता हैं, तो कोई पन्नी बीनकर अपना पेट पालता है. इन बच्चों को भी अच्छा जीवन जीने का अधिकार है. ऐसे में उन बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए सबको मिलकर पहल करनी चाहिए जितना हो सके ऐसे गरीब वर्ग के बच्चों को सपोर्ट करना चाहिए. जिससे की पढ़कर खुद को और परिवार को एक बेहतर जीवन दे सकें. ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें up24x7news.com हिंदी | आज की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट, पढ़ें सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट up24x7news.com हिंदी | Tags: Inspiring story, up24x7news.com Hindi OriginalsFIRST PUBLISHED : September 01, 2022, 11:36 IST