महाराष्ट्र में सियासी खेल फणनवीस की बाज की उड़ान वाले बयान में बड़ा रहस्य

Maharashtra Politics: महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति की सरकार बनेगी ही, सीएम भी भाजपा कोटे का ही होगा. पर, देवेंद्र फणनवीस के इस बयान में बड़ा रहस्य छिपा है कि बाज की उड़ान अभी बाकी है. क्या किसी बड़े सियासी खेल की तैयारी में फणनवीस लगे हैं?

महाराष्ट्र में सियासी खेल फणनवीस की बाज की उड़ान वाले बयान में बड़ा रहस्य
नई दिल्ली. देश के दो राज्यों में हाल ही विधानसभा के चुनाव संपन्न हुए हैं. महाराष्ट्र में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति को सरकार बनाने का जनादेश मिला है. झारखंड में भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए चूक गया. पिछली बार से भी अधिक दुर्गति एनडीए की झारखंड में हुई. भाजपा पिछली बार जितनी सीटें भी बरकरार नहीं रख पाई. उसकी सीटें 25 से घट कर 21 पर आ गईं. लगातार दूसरी बार झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के नेतृत्व में इंडिया ब्लाक की सरकार बन गई. चुनाव के नतीजे इंडिया ब्लाक के लिए इतने उत्साहजनक रहे कि अब लोग अनुमान लगा रहे हैं कि झारखंड से भाजपा का कहीं सफाया न हो जाए. फिर भी झारखंड के चुनाव की राष्ट्रीय फलक पर उतनी चर्चा नहीं हो रही, जितनी महाराष्ट्र चुनाव की गूंज सुनाई दे रही है. झारखंड चुनाव अचर्चित क्यों हो गया पिछले कई चुनावों से JMM की सीटें क्रमिक रूप से बढ़ती रही हैं. वर्ष 2005 में JMM को विधानसभा में 17 सीटें मिली थीं. 2009 में यह संख्या बढ़ कर 18 हो गई. 2014 में JMM ने 19 सीटें जीतीं, जो 2019 में बढ़ कर 30 हो गईं. इस बार तो JMM ने अकेले 34 सीटों पर जीत दर्ज की है, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 41 से महज 7 ही कम हैं. इसके बावजूद महाराष्ट्र विधानसभा के चुनाव की देश भर में चर्चा हो रही है, लेकिन झारखंड के नतीजे उत्तर पूर्व (North East) के राज्यों की तरह अचर्चित हैं. सच यह है कि झारखंड के चुनाव का राष्ट्रीय राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. क्यों हो रही है महाराष्ट्र की इतनी चर्चा इसी साल अप्रैल-मई में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस, शरद पवार की एनसीपी और उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने महा विकास अघाड़ी (MVA) के बैनर तले चुनाव लड़ा था. भाजपा, एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी ने महायुति के बैनर तले चुनाव लड़ा. महायुति ने 18 सीटें जीतीं. इनमें बीजेपी के खाते में 10, शिंदे की सेना को 7 और अजित पवार की एनसीपी को एक सीट मिली थी. एक सीट निर्दलीय के खाते में गई थी. दूसरी ओर महा विकास अघाड़ी (MVA) ने 30 सीटें जीतीं. इनमें कांग्रेस ने 13, उद्धव की सेना ने 9 और शरद की एनसीपी ने 8 सीटों पर कब्जा किया था. पांच महीने बाद ही हुए विधानसभा चुनाव में पूरा परिदश्य ही बदल गया. 288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में महायुति ने 230 सीटें जीत ली हैं और MVA को सिर्फ 46 सीटों से संतोष करना पड़ा है. महाराष्ट्र को देश की आर्थिक राजधानी कहा जाता है. नामचीन हस्तियां महाराष्ट्र में रहती हैं. लोकसभा में सीटों की संख्या की दष्टि से महाराष्ट्र उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे नंबर पर आता है. इसलिए महाराष्ट्र की चर्चा सर्वाधिक हो रही है. महाराष्ट्र पर चर्चा की और भी वजहें महाराष्ट्र विधानसभा के परिणामों पर खूब हो रही चर्चा की वजह सिर्फ महायुति का एमवीए पर हावी होना ही नहीं है. दरअसल महाराष्ट्र के चुनाव परिणाम भाजपा की सियासी राह आसान करते दिख रहे हैं. माना जा रहा है कि विधानसभा चुनाव परिणाम से आहत शरद पवार और उद्धव ठाकरे की बची-खुची पार्टी अगले पांच साल में और कमजोर हो सकती है. दोनों की पार्टियों में बड़ी टूट की आशंका मुंह बाए खड़ी है. इस आशंका का बड़ा आधार यह है कि शिवसेना की विचारधारा कांग्रेस से मेल नहीं खाती. उद्धव ठाकरे को ध्यान में रख कर जो लोग उनके साथ खड़े हैं, वे कांग्रेस के साथ रहने की उद्धव की जिद के कारण उनसे अलग हो सकते हैं. वे सीधे भाजपा की ओर मुखातिब हो सकते हैं या एकनाथ शिंदे के पाले में जा सकते हैं. अजित पवार के कारण शरद पवार के विधायक-सांसद भी पाला बदल सकते हैं. कांग्रेस के 13 सांसदों को छोड़ दें तो शरद पवार और उद्धव ठाकरे के 17 सांसद पाला बदल कर लें तो आश्चर्य नहीं. भाजपा का महाराष्ट्र पर फोकस क्यों भाजपा महाराष्ट्र के हालात को समझ रही है. भाजपा के इरादे को देवेंद्र फणनवीस के इस कमेंट से भी समझा जा सकता है. उन्होंने कहा- ‘बाज की असली उड़ान अभी बाकी है.’ दरअसल भाजपा बाज की असली उड़ान के इंतजार में है. फणनवीस के सहारे भाजपा महाराष्ट्र में वह खेल करना चाहती है, जिससे भाजपा की स्थिति केंद्र में भी मजबूत हो जाए. केंद्र में 240 सांसदों के कारण भाजपा अभी अपने बूते बहुमत से दूर है. अगर देवेंद्र फणनवीस की ‘असली उड़ान’ की उक्ति पर अमल हुआ तो भाजपा लोकसभा में भी बहुमत हासिल कर लेगी. यानी महाराष्ट्र के सहारे भाजपा को केंद्र में भी मजबूत होने का मौका मिल जाएगा. केपी मौर्या की नजर में कौन सांपनाथ तो कौन नागनाथ.. इसका क्‍या मतलब और वो ऐसा किसलिए कह रहे? सरकार बनते शुरू होगी बाज की उड़ान! भाजपा की रणनीति है कि पहले महाराष्ट्र में सरकार बन जाए. फिर बाज की उड़ान प्रक्रिया शुरू होगी. उड़ान भरने के लिए देवेंद्र फणनवीस को भाजपा ने खुली छूट दे दी है. अगर वे कामयाब हो जाते हैं तो उन्हें पार्टी राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बना सकती है. आरएसएस भी अब खुल कर भाजपा के साथ आ गया है. लोकसभा चुनाव में संघ के कटे रहने के कारण ही भाजपा लगातार उठान के बाद अचानक इस बार धड़ाम हो गई. इसमें भाजपा के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा का यह बयान विस्फोटक साबित हुआ कि अब भाजपा को आरएसएस की बैशाखी की जरूरत नहीं. फणनवीस से भाजपा को केंद्र में अपनी राह आसान होने की उम्मीद दिख रही है. Tags: Devendra Fadnavis, Maharashtra bjp, Maharashtra NewsFIRST PUBLISHED : December 2, 2024, 15:47 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed