जयपुर एयरपोर्ट बन रहा फ्लाइट डायवर्जन का हब विमानों की हो रही है रेलमपेल

Jaipur News : सर्दी के साथ ही बढ़ते कोहरे के कारण एक बार फिर से देश के अन्य हिस्सों से फ्लाइट्स को जयपुर एयरपोर्ट पर डाइवर्ट करने का सिलसिला शुरू हो गया है. इसके कारण जयपुर एयरपोर्ट उत्तर भारत का फ्लाइट डायवर्जन का हब बनता जा रहा है. पढ़ें ताजा हालात.

जयपुर एयरपोर्ट बन रहा फ्लाइट डायवर्जन का हब विमानों की हो रही है रेलमपेल
जयपुर. उत्तर भारत में बढ़ रही सर्दी, कोहरे और स्मॉग का असर जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी पड़ने लगा है. हालांकि कोहरे का असर जयपुर में नहीं है लेकिन उत्तर भारत के दिल्ली और अन्य शहरों में इसके कारण ना उतर पाने वाले विमानों को धड़ाधड़ जयपुर एयरपोर्ट डायवर्ट किए जा रहा है. यह सिलसिला अब पूरे विंटर सीजन में रहने वाला है. बीते एक सप्ताह 27 विमानों को जयपुर एयरपोर्ट डायवर्ट किया जा चुका है. पूरे उत्तर भारत में अब धीरे-धीरे सर्दी का गुलाबी रंग गहरा होता जा रहा है. बढ़ती सर्दी के बीच कोहरे और कम विजिबिलिटी उत्तर भारत के शहरों की ओर जाने वाली फ्लाइट्स की राह में रोड़ा बनने लगी है. जब तक मौसम साफ नहीं होता तब तक इन्हें दूसरे एयरपोर्ट्स की ओर डायवर्ट किया जाता है. ऐसे में जयपुर एयरपोर्ट इन विमानों के लिए डायवर्जन हब की भूमिका भी निभा रहा है. पिछले एक सप्ताह के भीतर ही तकरीबन 27 फ्लाइट्स को जयपुर डायवर्ट कर लैंड कराना पड़ा है. ये विमान देश और दुनिया के अन्य शहरों से दिल्ली, लखनऊ, जम्मू और चंडीगढ़ जा रहे थे. पिछले साल तकरीबन 350 विमानों को डाइवर्ट किया गया था बीते सोमवार को 11 दिल्ली बाउंड फ्लाइट्स जयपुर डायवर्ट हुईं. उनमें से 9 डोमेस्टिक और 2 इंटरनेशनल फ्लाइट्स थीं. यानी अभी तो शुरुआतभर है. मौसम की खराबी और कम विजिबिलिटी के बीच उड़ानों के डायवर्जन की तस्दीक इस बात से होती है कि पिछले साल तकरीबन 350 विमानों को दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य शहरों से जयपुर डायवर्ट करना पड़ा था. जयपुर एयरपोर्ट पर एक साथ 36 एयरक्राफ्ट को लैंड करवाया जा सकता है जाहिर है फ्लाइट डायवर्जन का यह सिलसिला नया नहीं है. इसी के चलते जयपुर एयरपोर्ट ने भी इस बार भी सर्दी के लिए भारी बंदोबस्त किए हैं. जयपुर एयरपोर्ट पर फिलहाल 36 पार्किंग-वे हैं. पहले इनकी संख्या 19 ही थी. अब एक साथ 36 एयरक्राफ्ट को यहां लैंड करवाकर हैंडल किया जा सकता है. देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जहां AWOS है इसके अलावा जयपुर एयरपोर्ट देश का पहला ऐसा एयरपोर्ट है जहां AWOS यानी ऑटोमेटेड वेदर ऑब्जर्विंग सिस्टम लगा है. मौसम की जानकारी का एक ऐसा रियलटाइम सिस्टम जो आसमानी विजिबिलिटी के हालात, बेरोमेट्रिक प्रेशर, हवा की दिशा, स्पीड और आसमान में बनी तमाम परिस्थितियां जैसे आसमानी बिजली जैसी कई जानकारियों से पायलट तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल-ATC दोनों को तुरंत अवगत कराता है. जयपुर एयरपोर्ट का रनवे 3407 मीटर लंबा है धुंध के दौरान अगर एयरक्राफ्ट को 50 मीटर विजिबिलिटी पर भी जयपुर एयरपोर्ट पर उतरना पड़े तो भी वह आसानी से उतर सकता है. यहां का 3407 मीटर लंबा रनवे CAT-3B इन्स्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम से लैस है जो काफी एफिशिएंट है. जयपुर के अलावा देश में दिल्ली, कोलकाता, अमृतसर, लखनऊ और बैंगलुरु के एयरपोर्ट ही इस सिस्टम से लैस हैं. यानी उत्तर भारत में खराब मौसम से बनी 50 मीटर से कम विजिबिलिटी की परिस्थितियों में जयपुर एयरपोर्ट ही एकमात्र राहत के तौर पर उभरता है. Tags: Big news, Domestic FlightsFIRST PUBLISHED : November 21, 2024, 11:35 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
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