आंखों-देखी: जब मंत्रों पर भारी पड़ गया रघुपति राघव राजाराम महात्मा गांधी के अस्थि विसर्जन का वो अनोखा किस्सा
30 जनवरी विशेष - बापू इस देश ही नहीं मानव सभ्यता का वो पड़ाव हैं जहां से मनुष्य शिष्ट होना सीखता है. जिस मोड़ से बराबरी और अहिंसा भी लड़ाई के मजबूत हथियार के तौर पर दिखते हैं. भारत के उस बापू की अस्थियां किसी की गलती की वजह से साढ़े चार दशक तक बैंक में रहने के बाद फिर से संगम के पवित्र जल में मिलाई गईं. इस अस्थिविसर्जन की आंखो देखी पढ़िए.