बिना प्लास्टिक बिना केमिकल 400 साल पुराने भारतीय खिलौनों के आगे फीके पड़ रहे हैं चीनी प्रोडक्ट जानें खासियत
बिना प्लास्टिक बिना केमिकल 400 साल पुराने भारतीय खिलौनों के आगे फीके पड़ रहे हैं चीनी प्रोडक्ट जानें खासियत
Hyderabad Hindi News: भारत की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाएं आज भी अपनी अनूठी पहचान बनाए हुए हैं. दक्षिण भारत, विशेष रूप से कर्नाटक के चन्नापटना क्षेत्र में बनने वाले लकड़ी के खिलौने करीब 400 वर्षों से इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. प्राकृतिक लकड़ी और सुरक्षित प्राकृतिक रंगों से तैयार किए जाने वाले ये खिलौने पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ बच्चों के लिए भी सुरक्षित माने जाते हैं. एक समय चीन के सस्ते प्लास्टिक खिलौनों के कारण इस कला पर संकट के बादल मंडराने लगे थे, लेकिन अब ‘वोकल फॉर लोकल’ और पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग ने इस पारंपरिक उद्योग को नई पहचान दिलाई है. देश-विदेश में इन हस्तनिर्मित खिलौनों की मांग तेजी से बढ़ रही है. यह कला न केवल भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखे हुए है