बाराबंकी के मेंथा की खेती से किसानों का हो रहा मोहभंगअब तरबूज से आस

किसानों का मानना है कि मेंथा की की खेती में लागत भी ज्यादा लगती है और बाजार में सही रेट भी नहीं मिल पाता. जिसके कारण हम लोगों की लागत भी नहीं निकल पाती. इसलिए किसान तरबूज की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. और इस खेती से उन्हें मेंथा के मुकाबले लगभग प्रति वर्ष लाखों रुपए मुनाफा भी होता है.

बाराबंकी के मेंथा की खेती से किसानों का हो रहा मोहभंगअब तरबूज से आस
बाराबंकी : बाराबंकी जिला वैसे तो केला और मेंथा की खेती के लिए फेमस है. यहां के किसान बड़े पैमाने पर मेंथा की खेती करते हैं. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से तरबूज की खेती किसानों को भाने लगी और आलम यह है कि इस बार जिले में तरबूज की बड़े पैमाने पर खेती की जा रही है. जिसके कारण यहां के किसानों का मेंथा की खेती से मोह भंग हो रहा है. इस बार जिले में करीब 300 हेक्टेयर से भी ज्यादा क्षेत्रफल में तरबूज की खेती की जा रही है. किसानों का मानना है कि मेंथा की की खेती में लागत भी ज्यादा लगती है और बाजार में सही रेट भी नहीं मिल पाता. जिसके कारण हम लोगों की लागत भी नहीं निकल पाती. इसलिए किसान तरबूज की खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. और इस खेती से उन्हें मेंथा के मुकाबले लगभग प्रति वर्ष लाखों रुपए मुनाफा भी होता है. किसानों के लिए वरदान तरबूज की खेती बाराबंकी जिला उद्यान अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि आलू और सरसों के बाद मेंथा की फसल की खेती होती थी. लेकिन अब तरबूज की नई प्रजातियां जो आ गई हैं उनका उत्पादन काफी मात्रा में होता है. तो किसानों का इसकी तरफ झुकाव है. इसका सबसे बड़ा रीजन यह है कि मेंथा की कीमत दो-तीन सालों स्थिर चल रही है. इसका जो रेट है 900 से 1200 में स्थिर हो गया है. जिसकी वजह से किसानों का मोह भंग हो रहा है. कम खर्च में हो रहा अच्छा मुनाफा जिला उद्यान अधिकारी महेश कुमार ने बताया कि लगभग 300 हेक्टेयर क्षेत्रफल में तरबूज की खेती हो रही है और एक एकड़ में तरबूज की खेती से लगभग 5 से 6 लाख रुपए तक किसानों को बचत हो जाती है. . Tags: Agriculture, Barabanki News, Local18, Uttar Pradesh News HindiFIRST PUBLISHED : April 30, 2024, 14:53 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
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