राहुल के एजेंडे पर साथी दल छिटकेमहाराष्‍ट्र चुनाव के बाद कांग्रेस का बुरा हाल

Rahul Gandhi News: कांग्रेस की रणनीति और राहुल गांधी के नेतृत्व को लेकर आलोचनाएं बढ़ रही हैं. उन्हें एक मजबूत और निर्णायक नेतृत्व देने का वादा किया गया था, लेकिन विपक्षी दलों में एकजुटता की कमी और राजनीतिक कूटनीति की घेराबंदी ने गठबंधन को अपने मकसद में असफल बना दिया है.

राहुल के एजेंडे पर साथी दल छिटकेमहाराष्‍ट्र चुनाव के बाद कांग्रेस का बुरा हाल
नई दिल्ली. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की तरफ से बुलाई गई ‘इंडिया’ ब्लॉक की बैठक में राहुल गांधी की तस्वीर सब कुछ बयां कर रही है. राहुल गांधी ने सीधे तौर पर बैठक की अगुवाई की और आगे के प्लान को लेकर ब्लूप्रिंट पेश किया. सूत्रों के अनुसार, गांधी ने बैठक में मौजूद लोगों से कहा कि “क्रोनी कैपिटलिज्म और ईवीएम लोगों के मुद्दे हैं.” सूत्रों ने कहा कि उन्होंने बैठक में पूछा, “जब केवल कॉरपोरेट्स को ही फायदा होता है और चुनावी प्रक्रिया में खामियां हैं और दूसरे विकल्पों को नकारा जाता है, तो यह लोगों का मुद्दा कैसे नहीं हो सकता?” इस बैठक में ‘इंडिया’ गठबंधन के संस्थापक सदस्य, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने हिस्सा नहीं लिया. यह तीसरी बार है, जब पार्टी गठबंधन की बैठक में शामिल नहीं हुई. इस बारे में पूछे जाने पर तृणमूल ने न्यूज18 से कहा, “हम इस बात को लेकर साफ हैं कि हम मोदी सरकार को लोगों के मुद्दों पर चुनौती देना चाहते हैं.” टीएमसी के मुताबिक, क्रोनी कैपिटलिज्म और ईवीएम जैसे मुद्दे लोगों के साथ नहीं जुड़ते. उन्होंने कहा, “देखिए उन क्षेत्रों को जहां राहुल गांधी ने प्रचार किया है. अगर उनकी बातों का लोगों पर असर होता, तो कांग्रेस क्यों हारती?” दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में ‘इंडिया’ गठबंधन को करारी शिकस्त मिलने के बाद कांग्रेस ने ईवीएम के खिलाफ आंदोलन छेड़ने की बात कही है. पार्टी का कहना है कि बैलेट पेपर से चुनाव को फिर वापस लाया जाए क्योंकि ईवीएम में छेड़छाड़ से चुनावी नतीजों पर असर पड़ रहा है. हालांकि, चुनाव आयोग ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. कांग्रेस अब ईवीएम के मुद्दे को भुनाना चाहती है, लेकिन पार्टी को साथी दल से ही निराशा मिली है. इस तरह से देखा जाए, तो महाराष्ट्र चुनाव के बाद कांग्रेस की हालत और खराब हो गई है. ईवीएम, क्रोनी कैपिटलिज्म टीएमसी, समाजवादी पार्टी (एसपी) और आम आदमी पार्टी (आप) जैसे सहयोगी कांग्रेस की ईवीएम और क्रोनी कैपिटलिज्म के खिलाफ “जुनून” को ज्यादा तवज्जो देने के मूड में नहीं है. कांग्रेस ने ‘भारत जोड़ो’ की तर्ज पर ‘ईवीएम जगाओ यात्रा’ की योजना बनाई है और ‘इंडिया’ ब्लॉक पार्टियों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया है, लेकिन उनमें से ज्यादातर ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई है. कुछ ने यह भी पूछा कि क्या यह यात्रा उन राज्यों से होकर गुजरेगी जहां कांग्रेस ने चुनाव जीते हैं. टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को ईवीएम को दोष देने के बजाय अपनी हार पर आत्ममंथन करना चाहिए. गठबंधन में सहयोगी, लेकिन सबकी राय अलग ‘इंडिया’ गठबंधन में विभाजन के पीछे असली राजनीति भी है. उदाहरण के लिए, दिल्ली में यह स्पष्ट है कि आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस सहयोगी नहीं होंगे. बंगाल में, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस कभी एकमत नहीं हो सकते. उत्तर प्रदेश में, अखिलेश यादव ने कहा है कि कांग्रेस खत्म हो चुकी है. कांग्रेस के कुछ सदस्यों ने धीरे से आवाज उठाई कि ईवीएम और इंडस्ट्रियलिस्ट चिंता का विषय है, लेकिन पार्टी को लोगों के मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए. यह एक ऐसा संकेत है, जिसे राहुल गांधी के करीबी लोगों ने नजरअंदाज कर दिया. अब जब यह स्पष्ट हो गया है कि ‘इंडिया’ गठबंधन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का एक मजबूत विकल्प नहीं है, तो क्या गांधी का जुनून और विश्वास इस अव्यवस्था को और बढ़ाएगा? राहुल गांधी के विचार कांग्रेस की राजनीति में हमेशा से अहम रहे हैं, लेकिन विपक्षी एकता के मामले में उनकी विचारधारा पर अक्सर सवाल उठाए गए हैं. कांग्रेस और उसके सहयोगियों के बीच बढ़ती असहमति, खासकर राज्य स्तर पर, यह संकेत देती है कि गांधी का अडिग रवैया गठबंधन के लिए और अधिक उलझनें उत्पन्न कर सकता है. Tags: Congress, INDIA Alliance, Mallikarjun kharge, Rahul gandhi, Special ProjectFIRST PUBLISHED : December 2, 2024, 23:31 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed