न जाने नर भेस में कब राक्षस मिलि जाय सुल्तानपुर का 100 साल पुराना दोहा जानें इसका मतलब

Sultanpur famous Doha: सुल्तानपुर के आनंद कुमार त्रिपाठी द्वारा संपादित ‘पंडित रामनरेश त्रिपाठी ग्रंथावली’ खंड 1 के काव्य संकलन में उनके दोहों का विस्तृत उल्लेख है. इसी में यह प्रसिद्ध दोहा भी दर्ज है. दोहा लिखने की पृष्ठभूमि पर बात करते हुए पंडित रामनरेश त्रिपाठी के पुत्र जयंत त्रिपाठी ने लोकल 18 से कहा कि पंडित जी अत्यंत दूरदर्शी और उच्च विचारों वाले थे. उन्होंने सुल्तानपुर के उन लोगों की आलोचना की जो ऊपर से धार्मिक और सज्जन दिखते थे. लेकिन भीतर से कपट, क्रूरता और स्वार्थ से भरे थे.

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