जब एक गीत से हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत सुल्तानपुर के क्रांतिकारी बैजनाथ सिंह को मिली थी सजा
जब एक गीत से हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत सुल्तानपुर के क्रांतिकारी बैजनाथ सिंह को मिली थी सजा
सुल्तानपुर के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा एक रोचक ऐतिहासिक प्रसंग आज भी लोगों को प्रेरित करता है. वर्ष 1931-32 के किसान आंदोलन के दौरान क्रांतिकारी बैजनाथ सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ एक बगावती गीत गाया था. ‘अगर जालिम हुकूमत को हटाना ही बगावत है, तो मैं भी एक बागी हूं...’ जैसी पंक्तियों के कारण उन्हें ब्रिटिश शासन की सजा का सामना करना पड़ा. यह घटना सुल्तानपुर के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज है.