कतर ने लगायी स्टेडियम में बीयर पीने पर पाबंदी आखिर क्या है शराब को लेकर मुस्लिम मान्यता
कतर ने लगायी स्टेडियम में बीयर पीने पर पाबंदी आखिर क्या है शराब को लेकर मुस्लिम मान्यता
कतर ने फीफा विश्व कप फुटबॉल के उद्घाटन से दो दिन पहले बड़ी घोषणा कर दी है. कतर ने स्टेडियम के अंदर बीयर पीने को लेकर आपत्ति लगाई है. इस फैसले को लेकर कुछ लोगों ने आपत्ति जताई है तो कुछ ने समर्थन किया है.
नई दिल्ली. फीफा विश्व कप फुटबॉल (Fifa World Cup 2022) के उद्घाटन से दो दिन पहले मेजबान कतर ने अपने एक फैसले से सभी को चौंका दिया. मेजबान देश ने अचानक स्टेडियम में बीयर की बिक्री पर पाबंदी लगा दी. इस फैसले की काफी आलोचना की गई और कुछ लोगों ने इसका स्वागत भी किया. इस पर कतर प्रशासन का कहना है कि हम दुनिया भर से आने वाले फुटबॉल प्रेमियों का स्वागत करते हैं लेकिन यहां आने वाले मेहमानों को भी हमारी संस्कृति और परंपरा का सम्मान करना चाहिए.
शराब को लेकर इस्लाम में किसी तरह की रियायत नहीं है,और यह वह नाजुक विषय है जिसे लेकर देश एक संतुलन स्थापित करने का प्रयास कर रहा है. शराब और मुस्लिम मान्यता क्या है आइए समझते हैं…
शराब पर क्या कहती है कुरान
इस्लाम में शराब पीना हराम यानी मना है. इसे लेकर इस्लामिक विद्वान और मुस्लिम धार्मिक अधिकारी आमतौर पर मुस्लिमों की पाक पुस्तक कुरान की एक आयत का जिक्र करते हैं, जहां इस नशीले पदार्थ को ‘शैतान का काम ’ बताया गया है और इस्लाम मानने वालों को इससे बचने के लिए कहा गया है. इसके साथ ही शराब को लेकर वह पैगंबर मोहम्मद के कथनों और शराब से होने वाले नकारात्मक प्रभावों का हवाला देते हैं.
शराब को लेकर मुस्लिम रवैया
वैसे तो इस्लाम में शराब पाबंदी का व्यापक रूप से पालन किया जाता है लेकिन सभी मुस्लिम इससे परहेज नहीं करते हैं. कुछ अकेले में या सार्वजनिक रूप से शराब का सेवन करते हैं. दुनियाभर के मुसलमानों पर प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वेक्षण में पाया गया कि ज्यादातर लोगों का कहना था कि शराब पीना नैतिक रूप से गलत है. ज्यादातर देशों में जहां यह सर्वेक्षण किया गया, जिनमें थाइलैंड, घाना, मलेशिया, फिलीस्तीनी क्षेत्र, इंडोनेशिया, नाइगर और पाकिस्तान में 10 में से 9 का यही विचार था. 2013 में प्रकाशित प्यू रिपोर्ट में 38000 लोगों से सवाल पूछे गए. हालांकि 37 में से 11 देशों में जब यह सवाल पूछा गया तो दस में कम से कम एक व्यक्ति ने यह कहा कि शराब पीना नैतिक तौर पर स्वीकार्य है. वहीं एक बड़े तबके ने कहा कि शराब पीना नैतिक मुद्दा नहीं है.
शराब पर पाबंदी कैसे होती है लागू
कुछ इस्लामिक देशों में शराब बिकती है, हालांकि नियम और कायदा व्यापक रूप से अलग होता है. इसकी बिक्री और जहां इसका सेवन किया जा रहा है वहां पर इसके नियम और प्रतिबंध थोड़े जटिल हो सकते है. कुछ देश जैसे सऊदी अरब, जहां पर शराब पर पूर्ण प्रतिबंध है, वहां शराब पीने पर कोड़े मारने की सजा, जुर्माना, कैद और विदेशियों को देश से निकालने की सजा दी जा सकती है. हालांकि इस साम्राज्य में बीते कुछ दिनों में मनोरंजन के विकल्प खुल रहे हैं ऐसे में शराब की खपत पर भी अटकलें लगाई जा रही हैं.
79 फीसद मुस्लिमों ने अनैतिक बताते हुए शराब को गलत ठहराया
वहीं कुछ इस्लामिक स्थानों में इस मामले में काफी छूट दी गई है जैसे, दुबई और संयुक्त अरब अमीरात. दुबई तो अपने विविधता भरे बार, नाइटक्लब और लाउंज को लेकर हमेशा चर्चा में रहता है और संपन्न प्रवासियों की पहली पसंद है. इसी तरह जॉर्डन में शराब दुकान में आसानी से बेची जाती है, और बार, रेस्त्रा में इसे परोसा भी जाता है. वहीं मुस्लिम बाहुल्य इजिप्ट में भी इसे लेकर कोई दिक्कत नहीं है. यहां पर युवा और अमीर लोग बार, क्लब और समुद्र किनारे शराब की चुस्कियां लेते देखे जा सकते हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिर भी प्यू सर्वेक्षण में इजिप्ट के 79 फीसद मुस्लिमों ने इसे अनैतिक बताते हुए शराब को गलत ठहराया.
पाबंदी और नियम तोड़ना
ऐसे देशों में, कुछ लोग शराब प्राप्त करने के लिए किसी भी हद तक चले जाते हैं, कभी-कभी गिरफ्तारी, या इससे भी बदतर जोखिम उठाते हैं. इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों में से एक सऊदी अरब में प्रतिबंध कम करने के प्रयासों की खबरें आई हैं. पिछले कुछ वर्षों में सऊदी अरब में शराब लेकर लोग चुपके से घुसने का प्रयास करते हैं. वे मोजे में छिपाकर व्हिस्की की बोतलें और पेप्सी के रूप में बीयर के कैन ले जाते हैं. हालांकि कुछ प्रयास त्रासदी में समाप्त होते हैं. 2002 में, मेथनॉल युक्त कोलोन पीने के बाद सऊदी अरब में 19 लोगों की मौत हो गई और अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया. ईरान में, जहरीली घरेलू शराब पीने के बाद मेथनॉल विषाक्तता से कुछ लोगों की मौत हुई है.
कतर में शराब पीना
कतर भी सऊदी अरब की तरह ही इस्लाम के अतिरूढ़िवादी रवैये को अपनाता है जिसे वहाबवाद के तौर पर जाना जाता है. यहां शराब की खपत और बिक्री पर सीमाएं हैं, लेकिन होटल और बार में सालों से इसे बेचने की अनुमति है. विश्व कप के दौरान भी शाम के वक्त स्टेडियम में और फैन जोन में बीयर को बेचा जाना था. लेकिन शुक्रवार को इसमें बदलाव किया गया और कहा गया कि स्टेडियम में केवल गैर-अल्कोहल युक्त बीयर ही उपलब्ध रहेगी. हालांकि महंगे आतिथ्य क्षेत्रों में शैंपेन, वाइन, व्हिस्की और दूसरी अल्कोहल परोसी जा सकती हैं. लेकिन एक बड़े वर्ग की इन क्षेत्रों तक पहुंच नहीं है. लेकिन शराब पाबंदी के मामले में कतर पहला देश नहीं है, इससे पहले 2014 में ब्राजील में भी स्टेडियम में शराब बेचने को लेकर ब्राजील सरकार को एक नियम में बदलाव करने के लिए मजबूर किया गया था. ब्राजील सरकार ने मैच के दौरान होने वाली हिंसा को रोकने के लिए शराब पर पाबंदी लगा दी थी. वहीं इस पाबंदी को हटाने वाले लोगों का कहना था कि विश्वकप के दौरान स्टेडियम में बीयर की बिक्री विश्व कप परंपरा का एक अहम हिस्सा है.
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Tags: Bear, Fifa World Cup 2022, QatarFIRST PUBLISHED : November 21, 2022, 17:18 IST