बुरहानपुर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल 5 पीढ़ियों से हिंदू परिवार घर पर बैठा रहा है ताजिया और सवारी

अशोक निमाड़कर और धर्मेंद्र निमाड़कर ने लोकल 18 से बताया कि हमारी 5वीं पीढ़ी में अब हम सेवा कर रहे हैं. हमारे दादा ने बुरहानपुर जिले का सबसे पहले ताजिया बनाया था उनका नाम कल्लू बटाना था उनके बाद से ही सब ने ताजिया बनाने की शुरुआत की थी. पहले कई बड़े-बड़े ताजिये बनाए जाते थे

बुरहानपुर में गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल 5 पीढ़ियों से हिंदू परिवार घर पर बैठा रहा है ताजिया और सवारी