हीट स्ट्रोक ने छीन ली आंखों की रोशनी नहीं मानी हार अब टेक्नोलॉजी से RJ समीर

मेरठ के गंगानगर के रहने वाले 54 वर्ष के समीर विश्नोई उन लोगों के लिए मिसाल पेश कर रहे हैं, जो दिव्यांग होने का दुखड़ा गाते हैं, जो अपनी विकलागंता को बेचारपन के तौर पर पेश करते हैं.

हीट स्ट्रोक ने छीन ली आंखों की रोशनी नहीं मानी हार अब टेक्नोलॉजी से RJ समीर
 विशाल भटनागर/ मेरठ:  जीवन में चुनौतियों से हार नहीं माननी चाहिए. जो जीवन के विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानता है. वही व्यक्ति जीवन में आगे बढ़ता है. इस स्टोरी के माध्यम से आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारे में बताएंगे, जो आंख से देख नहीं सकते हैं. लेकिन उनकी आवाज की दुनिया कायल है. मेरठ के गंगानर के रहने वाली रेडियो जॉकी समीर बिश्नोई के जीवन में वर्ष 2018 में एक ऐसी घटना घटी जिससे उनके जीवन में अंधेरा छा गया. हीट स्ट्रोक ने जीवन में मचाई तबाही रेडियो जॉकी समीर बिश्नोई ने लोकल-18 से खास बातचीत में बताया कि मार्केटिंग की नौकरी के दौरान वह जुलाई 2018 में सितारगंज गए हुए थे. तब तापमान अधिक होने की वजह से वह हीट स्ट्रोक का शिकार हो गए.  इससे वह अचानक सड़क पर बेहोश होकर गिर गए थे. इस घटना से उनकी आंखों में ब्लड उतर आया था. जिससे उनकी आंखों की दोनों परदे खराब हो गई. तब से वह ब्लाइंड की जिंदगी जी रहे हैं. हालांकि वह बताते हैं किउनके ससुराल पक्ष में इस विषम परिस्थिति में उनका काफी सहयोग किया. उनके साले डॉ अमित बिश्नोई और डॉक्टर अनुज बश्नोई ने हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं. नौकरी के लिए किए अनेकों प्रयास मिली निराशा समीर बिश्नोई बताते हैं कि जब उनकी आंखों की रोशनी चली गई थी. उसके बाद परिवार में आर्थिक चुनौतियां का संकट आ गया. उसके बाद उन्होंने अनेकों इंस्टिट्यूट में जॉब के लिए अप्लाई किया. लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा मिली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी उसके बाद उन्होंने बतौर आरजे सफर शुरू करने की ठानी. जिसके लिए उन्होंने उत्तराखंड देहरादून के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर द इंपावरमेंट आफ पर्सस विद विजुअल डिसेबिबिलिटीज में मार्च 2024 से अपनी पढ़ाई शुरू की. अब उनके विभिन्न जिगंल उत्तराखंड में गूंजते हुए दिखाई देते हैं. टेक्नोलॉजी बनी आंखों की रोशनी समीर बिश्नोई कहते हैं कि भले ही उनकी आंखों की रोशनी चली गई हो. लेकिन अब टेक्नोलॉजी उनके जीवन का उजाला बनी हुई है. टेक्नोलॉजी के सहारे जहां विभिन्न प्रकार कविताएं लिखते हुए वह जिंगल लोगों को सुनते हैं. इसमें ब्रेल लिपि, ऑडियो टेक्नोलॉजी एक बड़ा माध्यम है. बताते चलें कि समीर बिश्नोई की बेटी अन्यया बिश्नोई नीट की तैयारी करते हुए डॉक्टर बनना चाहती है. जिससे कि प्रत्येक गरीब व्यक्ति की मदद कर सके. वहीं समीर बिश्नोई की पत्नी अंजलि बिश्नोई घर का खर्च चलाने के लिए घर में ही एक छोटी सी दुकान चलाती हैं. Tags: Local18, Meerut newsFIRST PUBLISHED : May 7, 2024, 12:17 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed