23 साल की याशिका ने सिकल सेल बीमारी को दी मात दिल्ली के ये डॉक्टर बने भगवान अफ्रीका से आए बच्चों का भी किया इलाज

डॉ. गौरव खार्या ने बताया कि इस बीमारी में कम से कम 100 दिन तक ट्रांसप्लांट के बाद भी मरीज की मॉनिटरिंग की जाती है. 100 दिन बाद माना जाता है कि अब मरीज स्वस्थ है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद सिकल सेल डिसीज दोबारा होने की संभावना कम हो जाती है, क्योंकि इसमें डीएनए बदल देते हैं और मरीज का पूरा इम्यूनिटी सिस्टम ही बदल जाता है. एक नया इम्यूनिटी सिस्टम....

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