बच्चे के नाम पर लड़ बैठे मियां-बीबी तलाक की आई नौबत कोर्ट ने लगाया दिमाग

अक्सर कहते हैं कि नाम में क्या रखा है? शेक्सपियर तक कह चुके हैं कि नाम में क्या रखा है? मगर मैसूर में नाम को लेकर ही एक कपल तलाक करने को उतारू हो गए. हालांकि, अदालत की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पाया. जानिए कहानी.

बच्चे के नाम पर लड़ बैठे मियां-बीबी तलाक की आई नौबत कोर्ट ने लगाया दिमाग
मैसूर: कोर्ट में पति-पत्नी के बीच तलाक के मामले रोज आते हैं. अदालतें सुलह कराने की कोशिशें करती हैं. किसी मामलों में सफलता मिलती है तो किसी में असफलता. अदालतें पूरी कोशिश करती हैं कि पति-पत्नी के बीच सुलह हो जाए और शादी का रिश्ता न टूटे. इसी कड़ी में मैसूर की एक अदालत को सफलता तब मिली, जब बच्चे के नाम की वजह से एक कपल का तलाक होते-होते रह गया. कपल के बीच बच्चे के नाम को लेकर ही झगड़ा था. इस मामले में चार जजों और न्यायिक अधिकारियों की कोशिश रंग लाई है. पति-पत्नी की कोर्ट में ही दोबारा शादी कराई गई. इतना ही नहीं, कोर्ट ने बच्चे का नाम तक तय कर दिया. दरअसल, भले ही लोग कहते हों कि नाम में क्या रखा है? मगर मैसूरु में तलाक कर रहे कपल को इसका जवाब चार जजों और दूसरे न्यायिक अधिकारियों ने दिया. इन्होंने तलाक की दहलीज पर खड़े कपल के तीन साल के बच्चे के लिए एक नाम फाइनल किया और उन्हें अलग होने से भी बचा लिया. मामला शनिवार का है. अदालत ने कपल के बच्चे का नाम आर्यावर्धन रखा. इसके साथ ही इस कपल की तलाक वाली कहानी का अंत भी एकदम फिल्मी अंदाज में हुआ. तलाक के कगार पर खड़े इस कपल को इस फैसले ने फिर से एक कर दिया. कचहरी में ही दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाई और अपने तीन साल पुराने कड़वे झगड़े को पीछे छोड़ दिया. टीओआई की खबर के मुताबिक, मैसूरु जिले के हुनसुर के इस कपल में 2021 में बच्चे के जन्म के बाद नामकरण को लेकर झगड़ा शुरू हो गया. बच्चे की मां ने उसे ‘आदि’ बुलाना शुरू कर दिया. ये एक ऐसा नाम था जो आधिकारिक तौर पर जन्म रिकॉर्ड के लिए किसी भी सरकारी एजेंसी में रजिस्टर्ड नहीं था. पति को बच्चे के नाम से आपत्ति थी. वह पत्नी की बात पर सहमत नहीं था. दावा किया गया कि जब पत्नी प्रेग्नेंट थी और बच्चा हो भी गया, तब भी पति उससे नहीं मिला. पति चाहता था कि बच्चे का नाम भगवान ‘शनि’ के नाम पर रखा जाए. इसके बाद बस बच्चे के नाम को लेकर ही दोनों में महाभारत शुरू हो गई. करीब दो साल तक दोनों किसी भी नाम पर राजी नहीं हुए. आखिरकार पत्नी ने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता मांगते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया. इस समय सहायक लोक अभियोजक सौम्या एमएन ने बताया कि उन्होंने कपल को कई नाम सुझाए. आखिरकार दोनों ‘आर्यावर्धन’ नाम पर राजी हो गए. इसके बाद हुनसूर की जिला और सत्र न्यायालय ने शनिवार को सुनवाई के दौरान सर्वसम्मति से चुने गए इस नाम को औपचारिक रूप दे दिया. Tags: Karnataka, Karnataka News, Mysuru newsFIRST PUBLISHED : December 16, 2024, 11:01 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
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