Explainer: दुनिया में कम होने लगेगी आबादी वैज्ञानिकों ने बताया कब!
Explainer: दुनिया में कम होने लगेगी आबादी वैज्ञानिकों ने बताया कब!
Global Population Trends: आज दुनिया की आबादी भले ही बढ़ रही है, पर कुछ ही दशकों में यह कम होने लगेगी, एक स्टडी में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि उन्हें इसके संकेत पहले ही दिखने लगे हैं. उन्होंने आगाह किया है. इसका सबसे ज्यादा असर अर्थव्यवस्थाओं पर होगा,क्योंकि कम बच्चे पैदा होने से दुनिया के देशों की सबसे पहले श्रम शक्ति कम होने लगेगी, बढ़ती बूढ़ी आबादी की देखभाल करने मुश्किल हो जाएगा.
Global Population Trends: दुनिया की आबदी बढ़ रही है. हम इंसान 8 अरब पार हो चुके हैं और दुनिया के कई देशों में अधिक जनसंख्या बहुत बड़ी चुनौती है. पिछली एक सदी में दुनिया की आबादी में बहुत ही तेजी से उछाल आया है. हाल ही में एक अध्ययन में बताया गया है कि अभी भले ही दुनिया की आबादी बढ़ रही है. पर हालात चिंताजनक हैं क्योंकि आबादी तेजी से घटने वाली है. ऐसे में वैज्ञानिकों ने कई तरह के खतरों से आगाह किया है. इसका सबसे ज्यादा असर दुनिया की सारी अर्थव्यवस्थाओं पर होगा. भारत भी इससे अछूता नहीं रहेगा. राष्ट्रीय स्वयं सेवक प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस खतरे का कुछ हफ्ते पहले जिक्र किया था.
कब से बढ़ रही है दुनिया की आबादी
इतिहासकार बताते हैं कि होमोसेपियन्स बनने के बाद से इंसानों की आबादी बढ़ रही है, और दसवीं सदी तक यह कुछ करोड़ हो गई थी. लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद से लोगों का जीवन स्तर सुधरा और उसके बाद जनसंख्या में तेजी देखने को मिली 20वीं सदी में रफ्तार बहुत ही तेज हुई और 1900 में जो आबादी एक अरब थी, साल 2000 तक 6 अरब हो गई, जो साल 2022 में 8 अरब हो गई.
अब आगे क्या
अब अध्ययन बता रहे हैं कि अब दुनिया की बढ़ती आबादी की रफ्तार उलट जाएगी और द लेसेंट में प्रकाशित नए अध्ययन के मुताबिक साल 2055 में दुनिया के 204 में 155 देशों में इतने बच्चे पैदा नहीं हो सकेंगे कि दुनिया की आबादी स्थिर रह सके और 2100 तक दुनिया का 198 देशों का यह हाल हो जाएगा. और इसका सबसे बड़ा कारण एक ही है, तेजी से गिरती जन्म दर! शोधकर्ताओं का कहना है की उनके अब तक के सबसे व्यापक विश्लेषण के अनुसार हर साल मरने वालों की संख्या पैदा होने वालों से ज्यादा हो जाएगी. दुनिया भर की आबादी को देख कर अभी लगता है कि काश ये किसी तरह से कम हो जाए, लेकिन जल्दी यह सोच बदलने वाली है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Canva)
सबसे बड़ी चिंता की बात
हो सकता है कि ऐसा लगे कि कम जनसंख्या दुनिया के कई इलाकों को रहने के लिहाज से बेहतर जगह बना देगी, यहां तक कि संसाधनों पर पड़ रहा बहुत ज्यादा दबाव कम करने में मदद भी मिलेगी. लेकिन इसके बावजूद बात बहुत चिंता की है क्योंकि बहुत सी जगहों पर प्रजनन दर बहुत ज्याद गिर गई है और इसके ऐसे ही रहने की संभावना अधिक है.
क्या होगा बदलाव?
सबसे बड़ा बदलाव श्रमशक्ति या वर्कफोर्स पर होगा. जो कई दशकों तक कम होती जाएगी. आज कि अर्थव्यवस्थाएं श्रमशक्तियों पर बहुत निर्भर करती हैं. क्योंकि इससे सीधे पर देश की उत्पादकता पर विपरीत असर होगा. बूढ़ी आबादी अधिक हो गी, करदाताओं की संख्या सिमट जाएगी, समाज को चलाने के लिए जरूरी सेवाओं की कीमत चुकना मुश्किल होता जाएगा.
मुश्किलें अधिक बढ़ेंगी
बूढ़ी होती आबादी के से श्रम शक्ति तो कमजोर होगी ही, इस आबादी का भी ख्याल रखना खर्चीला होता जाएगा, चिकित्सा क्षेत्र पर दबाव बढ़ जाएगा, वहां सक्षम कामगारों की भारी कमी होगी. बेशक संसाधनों पर दबाव कम होगा और प्रदूषण भी कम होगा, लेकिन जनसंख्या का असामान्य वितरण एक नई तरह की चुनौती ला देगा और संसाधन प्रबंधन कठिन हो जाएगा. दुनिया भर में राजनैतिक स्तर पर इन बदलावों का असर साफ दिखेगा.
भारत नहीं रहेगा अछूता
ऐसा नहीं है कि इन सबका असर भारत पर नहीं पड़ेगा, बल्कि भारत उन चिंताओं से घिर जाएगा जिनसे आज चीन और जापान और कोरिया जैसे देश परेशान हैं. भारत में बूढ़ी आबादी बहुत ही अधिक हो जाएगी जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा. लेकिन भारत जैसे देश में ऐसी समस्याओं के अलावा और भी चुनौतियां देखने को मिलेंगी. सामाजिक स्तर पर बदलाव भारतीय संस्कृति को बहुत नुकसान पहुंचाएंगे. दुनिया भर में महिलाओं पर ज्यादा बच्चे पैदा करने का दबाव बढ़ाया जाएगा. परिवार, खास तौर से संयुक्त परिवार बचाने पर ज्यादा जोर दिया जाएगा.
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गौरतलब है कि यही चेतावनी कुछ हफ्तों पर आरएसस प्रमुख मोहन भागवत ने भी जताई थी. उन्होंने कहा था, “जनसंख्या विज्ञान कहता है कि जब किसी समाज की जन्म दर 2.1 से नीचे चली जाती है, तो वह समाज और परिवार खत्म होने लगते हैं. यदि हम इससे अधिक दर चाहते है तो हमें हर परिवार में दो से अधिक बच्चों की जरूरत है. ऐसे में हर परिवार में तीन बच्चों पर जोर देना चाहिए.”
Tags: Bizarre news, Science facts, Science news, Shocking news, Weird newsFIRST PUBLISHED : December 20, 2024, 12:00 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed