बिहार में जब-जब व्रत और त्योहार का समय आता है तब कभी नाव डूब जाती है तो कभी चाली टूट जाती है, तो कभी खेल-खेल या सेल्फी लेने के चक्कर में लोग डूब जाते हैं. इस तरह के हादसे लगातार देखने को मिल रहे हैं. हाल-फिलहाल की घटना बाढ़ की हो या फिर कुछ वर्ष पहले छठ पूजा के दौरान हुआ हादसा, या पटना के गांधी मैदान मची भगदड़ हो या आरा में गंगा दशहरा के दौरान सेल्फी लेने में 4 लोगों की डुबाने से मौत का मामला हो, इन सभी हादसों में कहीं ना कहीं लापरवाही देखने को मिली है.
तीज-त्योहार के दिन इस तरह के हादसों को लेकर के पटना के कई जगह चर्चा का बाजार गर्म रहता है जब-जब हादसे आते हैं तो लोगों को भी यह सूझता है कि हादसा के पहले हमें सुरक्षा मुहैया करनी चाहिए थी या फिर जागरुकता फैलानी चाहिए थी. कोई हादसे के पहले क्विक रिस्पांस टीम बनाने की बात करता है तो कोई लोगों को खुद से सूझबूझ कर हादसे वाली जगह नहीं पहुंचाने की बात करते हैं.
हमारे दानापुर संवाददाता अमरजीत शर्मा ने इन्हीं सब मुद्दों पर बात कर रही कुछ टोलियों के साथ मौजूद रहकर उनकी चर्चा सुनी. टोली की चर्चा की बातों को आपके समक्ष रख रहे हैं. अमरजीत शर्मा जब सुबह-सुबह बेऊर मोड़ के शिवपुरी में एक जगह पहुंचे तो वहां कमलेश कुमार, टीपन राय, भगवान पांडे, विद्या यादव और मुकेश कुमार एक जगह बैठकर इन्हीं हादसों की चर्चा कर रहे थे. चर्चा के दौरान कमलेश कुमार ने कहा कि जब-जब पर्व-त्योहार आते हैं तभी हादसे हो जाते हैं. एक दिन पूर्व बाढ़ में गंगा दशहरा के दौरान गंगा नहाने गए लोगों की नाव गंगा में डूब गई. नाव पर 17 लोग सवार थे. सभी लोग नालंदा जिला के मालती के रहने वाले एक ही परिवार के थे. उनका कहना था कि भीड़ में जाने से पहले अपनी सतर्कता भी रखनी जरूरी होती है. वहां पर जब पहुंचें तो अपनी सुरक्षा का ख्याल भी रखें. कल हुए नाव हादसे में लोगों ने इसका ख्याल नहीं रखा. उन्होंने छोटी नाव किराये पर ली और ज्यादा लोग सवार हो गए. यही वजह है कि नाव अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई. और अभी भी 17 लोगों में चार लोगों की तलाश जारी है. जिला प्रशासन के तरफ से भी तुरंत मदद पहुंचाने के लिए ठोस व्यवस्था नहीं की गई. बल्कि स्थानीय लोगों ने ही मदद पहुंचाई और लोगों की जान बचाई. इसलिए प्रशासन को चाहिए कि आम लोगों को जागरुक करें और उन्हें भी ऐसी ट्रेनिंग दें कि दूसरे लोगों की जान बचा सकें.
अपनी बात रखते हुए टीपन राय ने कहा कि सरकार जब हादसा होता है, उसके बाद ही वहां पहुंचकर अपनी सक्रियता दिखाती है. लेकिन हादसे के पहले ही अगर सक्रियता दिखा दे तो हादसा नहीं हो. कुछ वर्ष पूर्व पटना में भी छठ पूजा के दौरान चाली टूटी थी. गांधी मैदान में दशहरा के मेले पर भगदड़ मची थी. उसमें दर्जनों लोग मारे गए थे. जबकि प्रशासन को पहले से मालूम था कि वहां भीड़ ज्यादा होने वाली है. ऐसे में जहां भी ज्यादा भीड़ होने वाली जगह है वहां प्रशासन को पहले से ही सतर्कता बरतनी चाहिए. जागरुकता फैलानी चाहिए. लोगों को भीड़ से बचने के उपाय करने के लिए जागरूक करना चाहिए. लेकिन ऐसा नहीं होता है. और यही वजह है कि लोग हादसे के शिकार हो जाते हैं. हालांकि, जीवन और मौत पर किसी का वश नहीं होता है, लेकिन सतर्कता और जागरुकता से कई लोगों की जान बच भी सकती है.
ठेकेदारी का काम करने वाले मुकेश कुमार का कहना है कि जहां पर भीड़ या मेला लगने वाली जगह है वहां सिस्टम काम नहीं करता है. इसलिए ऐसा सिस्टम बनाना चाहिए जिसमें कभी भी कोई हादसा हो तो लोग आसानी से वहां से निकल सकें और किसी भी हादसा को टालने के लिए लोगों को पहले से प्रशासन को जागरुक भी करना चाहिए. अपनी स्पेशल टीम को भी विशेष ट्रेनिंग देनी चाहिए.
भगवान पांडे का भी कहना है कि लोगों को भी भीड़ वाली जगह जाने से बचना चाहिए. अगर गंगा स्नान के लिए जा रहे हैं तो खुद सतर्क रहकर जाएं. हालांकि, कई जगह सरकार के तरफ से बैरिकेडिंग किया जाता है ताकि लोग खतरे में ना पड़ें.
बुजुर्ग विद्या यादव का कहना है कि जहां भीड़ होगी वहां थोड़ी-सी चूक हादसे में तब्दील हो सकती है. इसलिए भीड़ वाली जगह लोगों को जाने से बचना चाहिए. लोगों को भी प्रशासन की तरफ से जागरुक करना चाहिए.
महावीर कॉलोनी मंदिर के पास बैठे कुछ लोगों के बीच जब हमारे दानापुर संवाददाता अमरजीत शर्मा पहुंचे तो वहां भी हादसों की चर्चा हो रही थी कि आखिर ये हादसे क्यों हो जाते हैं. यहां लोगों का कहना था कि तीज-त्योहार के दौरान गंगा स्नान के लिए लोगों की भीड़ जुटती है. लोग नाव में सवार होकर नौकाविहार का आनंद लेते हैं. लेकिन कई बार नाव में क्षमता से ज्यादा लोग सवार हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में हादसा होने की संभावना ज्यादा होती है. इसलिए लोगों को खुद की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए. साथ ही सरकार को इस पर नियंत्रण रखना चाहिए कि नाव किसी अन्य वाहन में ओवरलोडिंग ना हो.
शिक्षक बालेंदर शर्मा का कहना है कि बिहार में ही इस तरह के ज्यादा हादसे होते हैं. हमने दूसरे प्रदेशों में देखा है कि इस तरह के जब भी कोई पर्व होता है तो वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते हैं. बैरिकेडिंग किया जाता है. हर छोटे-बड़े पर्व में गंगा स्नान करने वाले लोगों की सुरक्षा के इंतजाम किए जाते हैं. एसडीआरएफ, एनडीआरएफ की टीम लगाई जाती हैं लेकिन बिहार में सुरक्षा के इंतजाम को लेकर प्रशासन सजग नहीं है. और प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ता है. पटना में नाव हादसा हो या छठ पूजा में भगदड़, ऐसे हादसों में प्रशासन की चूक सामने आते रहती है. और ये घटनाएं आए दिन होती रहती हैं. लेकिन प्रशासन है कि सोया रहता है. मानो कि उसे हादसों का इंतजार रहता हो. अगर सरकार के तरफ से स्पेशल टीम के इंतजाम किए जाएं तो यह हादसे टाल सकते हैं.
सिविल सेवा की तैयारी करने वाले उत्तम कुमार का हादसों के मामले में कहना है कि इस तरह के आयोजन को लेकर हमेशा सतर्क रहना चाहिए. नदियों पर गोताखोरों का अलग से इंतजाम होना चाहिए. जहां भी भीड़ लगती है वहां जिला स्तर गोताखोर और क्विक रिस्पांस टीम होनी चाहिए.
शिक्षक अनिल शर्मा भी अपनी बात को रखते हुए कहते हैं कि जागरुकता सबसे जरूरी है. गंगा घाट पर ही ज्यादातर हादसे होते आए हैं इसलिए गंगा घाट पर जहां भीड़ ज्यादा लगती है वहां एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम के साथ गोताखोर की टीम मौजूद होनी चाहिए.
शशि भूषण शर्मा का कहना है कि हम लोग को खुद जागरुक रहना होगा तभी हादसे को रोक पाएंगे. जहां ज्यादा भीड़ लग रही है नहीं जाना चाहिए. क्षमता से अधिक भरे वाहन या नाव पर नहीं चढ़ना चाहिए. महावीर कॉलोनी के मुकेश कुमार का कहना है कि ज्यादा भीड़ लगेगी और अनियमित होगी तो हादसे होंगे. गंगा घाट पर कई बार देखा जाता है कि लोग सेल्फी लेते हैं. गंगा के पानी में घुसकर सेल्फी लेना चाहते हैं और इसी दौरान कई बार हादसे हो जाते हैं. आरा में भी एक हादसा हुआ जिसमें चार युवक की मौत हो गई. यह हादसा सेल्फी लेने के दौरान हुआ.
बरहाल तमाम तरह की चर्चाओं के मुताबिक, हादसे के पहले लोगों को जागरुक करने की जरूरत है ताकि हादसा ना घटे. साथ ही प्रशासन की तरफ से विशेष इंतजाम की जरूरत है जिसमें लोग नियम से चल सकें.
Tags: Bihar News, PATNA NEWSFIRST PUBLISHED : June 17, 2024, 15:38 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed