कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गया अखंड भारत का सबसे महान साम्राज्य चाणक्य-चंद्रगुप्त के सपनों का अंत और शुंग युग के उदय की पूरी कहानी
कैसे ताश के पत्तों की तरह ढह गया अखंड भारत का सबसे महान साम्राज्य चाणक्य-चंद्रगुप्त के सपनों का अंत और शुंग युग के उदय की पूरी कहानी
Ancient Indian History News : इतिहास की घड़ी को यदि हम लगभग 2300 साल पीछे घुमाएं तो हमें एक ऐसा भारत दिखता है जिसकी सीमाएं आज के अफगानिस्तान से लेकर म्यांमार तक फैली थीं. यह मौर्यों का काल था. एक ऐसा साम्राज्य जिसकी नींव आचार्य चाणक्य की कूटनीति और चंद्रगुप्त मौर्य के पराक्रम पर टिकी थी. लेकिन, जिस साम्राज्य ने सिकंदर के सेनापतियों को धूल चटाई, वह आखिर कैसे अंदरुनी कलह और कमजोरियों की भेंट चढ़ गया?