आज भी जयपुर के ठठेरों के रास्ते में जीवित है 300 सालों की कला लेकिन घटती डिमांड ने छीने रोजगार!
आज भी जयपुर के ठठेरों के रास्ते में जीवित है 300 सालों की कला लेकिन घटती डिमांड ने छीने रोजगार!
Jaipur News : जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र में ठठेरों का रास्ता अब भी तांबा, पीतल, कांसे के हस्तनिर्मित बर्तनों के लिए मशहूर, कारीगर सरकारी संरक्षण की मांग कर रहे हैं. लोकल-18 ने ठठेरों के रास्ते में पहुंचकर यहां के कारीगरों से बातचीत की. विजय कुमार ठठेरा बताते हैं कि वह ठठेरी कला की तीसरी पीढ़ी से जुड़े कारीगर हैं. इस कला को उनके दादा धर्मीलाल और बाद में उनके पिता बाबूलाल ने करीब 150 वर्षों तक जीवित रखा. विजय बताते हैं कि राजा-महाराजाओं के समय उनके पूर्वजों को ठठेरी कला के कारण आमेर से जयपुर की चारदीवारी में बसाया गया था.