बच्चे को याद आते हैं पापा तो झूठे कॉल लगाती है मां न पर्व न त्योहार सब वीरान

Bihar poisonous liquor case: बिहार में जहरीली शराब से अबतक सैकड़ों जान जा चुकी है. खासकर वैसे परिवार तबाह हो जाते हैं जिस घर का कोई युवा जान गंवा देता है. इसके पीछे पत्नी, बच्चे समेत कई परिजन पूरे जीवन दर्द झेलने को मजबूर रहते हैं. ऐसा ही एक मामला मुजफ्फपुर के श्याम के परिवार का है जहां मासूम बच्चों के सवालों का जवाब भी देना एक मां के लिए मुश्किल है. भाई बरबस रो पड़ते हैं तो श्याम की मौत के दो महीने बाद भी घर में मातम पसरा है. इस मामले की ग्राउंड रिपोर्ट आगे पढ़िये.

बच्चे को याद आते हैं पापा तो झूठे कॉल लगाती है मां न पर्व न त्योहार सब वीरान
हाइलाइट्स जहरीली शराब से हुई थी श्याम की मौत, 2 महीने बाद भी मातम में परिवार. श्याम की पत्नी दरवाजे की ओट लेकर पथराई आंखों से बाहर देखती रहती. मृतक श्याम के छोटे भाई अर्जुन अपने बड़े भाई को याद करके रो पड़ते हैं. मुजफ्फरपुर/प्रियांक सौरभ. बिहार में शराबबंदी वर्ष 2016 से ही लागू है. इन आठ वर्षों में कई सकारात्मक नतीजे मिले हैं तो वहीं अवैध शराब के कारोबार ने कई जिंदगियों और परिवारों को तबाह कर डाला है. बिहार सरकार ने हाल ही में कुबूल किया था कि अप्रैल 2016 में शराबबंदी लागू होने के बाद से अवैध शराब के सेवन से 150 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. ये सरकारी आंकड़े हैं, लेकिन गैर सरकारी आंकड़ों में ये संख्या 300 से भी अधिक बताई जाती है. अलग अलग जिलों में अक्सर जहरीली शराब से मौत के कई मामले सामने आए. जहरीली शराब पीकर सिर्फ लोगों की जान ही नहीं जा रही, बल्कि उसके बाद उसके परिवार की हालत और बदतर हो जाती है. खासकर जब कोई युवा मर जाए तो परिवार एकदम टूट जता है, सब कुछ खत्म सा हो जाता है. कुछ ऐसा ही हुआ था करीब दो महीने पहले मुजफ्फरपुर के हथौड़ी थाना क्षेत्र के डीहजीवर गांव में. यहां संदेहास्पद पेय पदार्थ पीने से एक ही गांव के दो युवा दोस्तों की जान चली गई. पहले 25 वर्षीय श्याम सहनी और फिर उसी गांव के मुकेश सहनी की भी मौत हो गई. परिजनों ने बताया कि दोनों ने जहरीली शराब पी थी, जिसकी वजह से 22 अक्टूबर की रात को श्याम की मौत हो गई. वहीं 23 अक्टूबर को मुकेश की मौत हो गई. दोनों की मौत से पहले आंखों की रौशनी चली गई थी. हालांकि पुलिस ने जहरीली शराब से मौत की बात ओ नकार दिया था. दो महीने बाद आज भी मातम है श्याम का पूरा परिवार- डिहजीवर के रहने वाले चंद्रकुमार सहनी के 25 वर्षीय पुत्र श्याम सहनी जो टेंट हाउस और कपड़ा का दुकान चलाता था, साथ में इंटर की पढ़ाई कर रहा था. श्याम शादीशुदा था और उसके दो मासूम बेटे थे. इन्हें ये पता भी नहीं कि अब उसके पापा इस दुनियां में नहीं हैं. 22 अक्टूबर को श्याम की संदेहास्पद स्थिति में मौत हो गई थी. परिजनों के अनुसार, श्याम ने पास के ही एक साथी के साथ जहरीली शराब पी थी. श्याम की मौत दो महीने से ऊपर हो गये हैं, लेकिन परिवार में आज भी गम का माहौल है. बूढ़े मां-बाप बेटे को याद करके आज भी रो देते हैं. वहीं, पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है. पत्नी और सभी बड़े तो थोड़ा हिम्मत भी दिखाते हैं, लेकिन जब श्याम के मासूम बच्चे पापा को ढूंढ़ते है सबका कलेजा कांप जाता है और रोने लगते हैं. श्याम के मासूम बच्चे पापा को ढूंढते हैं तो मां रेणु देवी झूठा दिलासा देती है. परिवार टूट चुका है, कोई सो नहीं पाता… श्याम की पत्नी रेणु रोज दिन गिनती है. पति से बिछड़े हुए उन्हें दो महीना हो गया, लेकिन वो उनके साथ बीते पल को नहीं भूल पाती. दो मासूम बच्चों की जिम्मेदारी कैसे उठाएगी, ये टेंशन उसे जीने नहीं देती. फिलहाल घर में सास-ससुर, देवर सब है, लेकिन आगे क्या होगा ये नहीं समझ आता. रेणु बताती है कि दो महीना हो गया लेकिन रात में कोई नहीं सो पाता, उनके बिना जीवन मुश्किल सा लगता है, परिवार पूरा टूट चुका है. झूठे कॉल लगाकर बच्चे को सांत्वना… पति को याद करते करते रेणु के आंखों में आंसू आ जाते हैं. दरवाजे के तरफ भीगी आंखों से निहारती रेणु बस पति को याद करके रोती रहती है. जब बच्चे पूछते हैं कि पापा कहां हैं तो उसके पास कोई जवाब नहीं होता. बोलती है कि पापा बाजार गये, और फिर झूठमूठ का कॉल लगाकर पति से बात करके बच्चों को सांत्वना देती है. दो मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया. छोटे भाई को याद कर बड़े भाई की आंखें भर आती हैं. पापा को याद कर सब रोने लगते हैं… श्याम की मां सुन नहीं सकती, लेकिन बेटे को याद करके अक्सर रोती रहती है. परिवार के लोग श्याम के बिना टूट गये हैं. न कोई सही से खाना खाता है, न सही से सो पाता है. श्याम के छोटे भाई अर्जुन अपने बड़े भाई को याद करके रो देते हैं. अर्जुन कहते हैं कि उनके बिना सब अधूरा लगता है, ना पर्व न त्योहार उनके बिना कुछ भी नहीं है. बड़े भाई के जाते ही घर का माहौल ही चेंज हो गया, उनके बच्चे पापा को याद करते हैं तो सब रोने लगते हैं. किसी तरह बच्चों को दिलासा देते हैं. घर के दरवाजे पर मासूम बच्चों के साथ बैठी रेणु देवी जहरीली शराब बनाने वालों को बददुआ देती हैं और शराबबंदी पर सवाल उठाती हैं. मासूम बच्चों का भविष्य भी छिन गया… ये सब कहते कहते अर्जुन की आंखों में आंसू भर जाते हैं. आंसू भरी आंखों से बरबस अपने भाई को याद करते हैं. आज श्याम का परिवार टूट चुका है, जहरीली शराब ने ना सिर्फ श्याम की जिंदगी को छीना, बल्कि उसके साथ श्याम की पत्नी, दोनों बच्चे, दो भाई, मां -बाप और अपनों की खुशी भी छीन ली, मासूम बच्चों का भविष्य छीन लिया, जिसे पूरा कर पाना शायद मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा है. Tags: Bihar crime news, Muzaffarpur latest news, Poisonous liquor caseFIRST PUBLISHED : December 25, 2024, 08:38 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें
Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed