ईंट-भट्ठे की मजदूरी छोड़ी जमीन नहीं थी तो लीज पर ली शुरू की मिश्रित खेती दिवाकर ने सब्जी से बदली जिंदगी

Raebareli Success Story: दिवाकर बताते है कि वे साल में 2 फसलें लेते है. अगस्त से फरवरी तक वे सिंघाड़े की खेती करते है और मार्च से जुलाई तक तोरई, लौकी, कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां उगाते हैय इस तरह वे अच्छा मुनाफा कमा रहे है. वे बताते है कि दोनों फसलों को मिलाकर साल भर में लगभग 40 से 50 हजार रुपये का खर्च आता है, लेकिन इसके बदले उन्हें सालाना अच्छा मुनाफा मिल जाता है. खेत में तैयार सब्जियों को वे रायबरेली और बछरावां की बाजारों में बेचते है.

ईंट-भट्ठे की मजदूरी छोड़ी जमीन नहीं थी तो लीज पर ली शुरू की मिश्रित खेती दिवाकर ने सब्जी से बदली जिंदगी