संत सांड पुरस्कार और गद्दार ऐसी-वैसी बातों से तो अच्छा है खामोश रहो !

दौर एआई की ओर बढ़ रहा है और मनुष्य सोशल के जरिए बेवजह की बहस में उलझता दिख रहा है. इन दिनों सोशल पर कुणाल कामरा, विनोद कुमार शुक्ल को ज्ञानपीठ पुरस्कार और मध्य प्रदेश के कांग्रेस विधायक के साधु संत सांड जैसा चर रहे टाइप बयानों को लेकर लोग उलझे दिख रहे हैं. बोलने की आजादी का क्या यही मतलब है?

संत सांड पुरस्कार और गद्दार ऐसी-वैसी बातों से तो अच्छा है खामोश रहो !