ट्विन टॉवर की धूल और प्रदूषण में अगले 48 घंटे चुनौतीपूर्ण विशेषज्ञ बोले-ऐसे करें बचाव
ट्विन टॉवर की धूल और प्रदूषण में अगले 48 घंटे चुनौतीपूर्ण विशेषज्ञ बोले-ऐसे करें बचाव
दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के रेस्पिरेटरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज गुप्ता कहते हैं कि इन इमारतों को विस्फोट से उड़ाया गया है ऐसे में इसमें दो तरह के प्रदूषक तत्व मौजूद हैं. पहला बारूद के जलने से पैदा हुए कार्बन पार्टिकल या गैसें आदि और दूसरा है निर्माण सामग्री से यानि सीमेंट-बालू आदि के ढहने से धूल और मिट्टी पैदा हुए डस्ट पार्टिकल हैं.
नई दिल्ली. सुपरटेक ट्विन टॉवर आखिरकार आज धराशायी हो गईं. हालांकि इन टॉवरों के गिरने बाद इनसे उठा धूल, मिट्टी और गैसों का गुबार आसपास के लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा हो सकता है. यही वजह है कि ट्विन टॉवर स्थल के आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए अगले 24 से 48 घंटे चुनौतीपूर्ण हैं. ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से सावधानियां बरतने की अपील कर रहे हैं. वहीं कोई भी लक्षण प्रकट होने पर तत्काल हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह लेने के लिए कह रहे हैं.
दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल के रेस्पिरेटरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज गुप्ता कहते हैं कि इन इमारतों को विस्फोट से उड़ाया गया है ऐसे में इसमें दो तरह के प्रदूषक तत्व मौजूद हैं. पहला बारूद के जलने से पैदा हुए कार्बन पार्टिकल या गैसें आदि और दूसरा है निर्माण सामग्री से यानि सीमेंट-बालू आदि के ढहने से धूल और मिट्टी पैदा हुए डस्ट पार्टिकल हैं. चूंकि बारूद तो जल जाता है ऐसे में उससे का अवशेष बहुत कम बचता है लेकिन कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल की गई सामग्री से जो धूल और पार्टिकुलेट मेटर पैदा हुए हैं वे ज्यादा खतरनाक हैं. इस दौरान सीमेंट से जो धूल पैदा हुई है, जो मशरूम क्लाउड बना है वह किलोमीटरों तक गया है. इससे न केवल वहां आसपास रहने वाले बल्कि दूर-दराज तक जहां भी यह डस्ट जाएगी वहां तक शरीरों पर इसका गंभीर असर होगा.
डॉ. गुप्ता कहते हैं कि जैसे ही यह डस्ट और पीएम 2.5 सांस के माध्यम से फेफड़े के अंदर जाएगा और शरीर में इसका एक्सपोजर होगा तो काफी स्वास्थ्य को परेशानियां हो सकती हैं. यह कान, नाक, आंख, गले, त्वचा, बाल, फेफड़े, सांस हर जगह प्रभाव डालेगा. जिनको पहले से ही सांस की बीमारी है, उन्हें अस्थमैटिक अटैक हो सकता है, दिवाली के आसपास बहुत ज्यादा डस्ट स्टोर्म होता है उसी का काफी असर होता है. जबकि यहां तो बहुत बड़ी मात्रा धूल पैदा हुई है. एक तरह से डस्ट मशरूम क्लाउड बन गया है. चूंकि सीमेंट और बालू में सिलिका पार्टिकल होते हैं वे इरिटेंट होते हैं और वे आंख, कान, नाक गले में खुजली कर सकते हैं.
नोएडा सुपरटेक ट्विन टॉवर डेमोलिशन को लेकर प्रशासन की ओर से तय किए गए फेलिक्स अस्पताल के एमडी डॉ. डी के गुप्ता कहते हैं कि ट्विन टॉवर के ढहने के बाद जो धूल का गुबार उठा है वह स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है. ऐसे में लोगों को बहुत ध्यान देने और इस धूल व मिट्टी से बचाव करने की जरूरत है. फेलिक्स अस्पताल की ओर से इस संबंध में एक एडवाइजरी भी जारी की गई है.
ये हो सकती हैं परेशानियां
. सांस संबंधी परेशानियां जैसे सांस फूलना, दम घुटना, सांस न ले पाना
. अस्थमा
. ब्रोंकाइटिस
. त्वचा, कान, नाक, आंख में खुजली और जलन
.अगर अस्थमैटिक हैं तो अस्थमा का अटैक का आ सकता है
. सांस नली में सूजन
. फेफड़ों में परेशानी
ये दिखाई दें लक्षण तो करें डॉक्टर से संपर्क
. सांस लेने में दिक्कत और ऑक्सीजन स्तर 92 से कम होना.
. सीने में दर्द
. घबराहट, चक्कर आना, दिल की धड़कन का बढ़ जाना
. आंखें लाल होना
. त्वचा में चकत्ते पड़ जाना
. ब्लड शुगर कम या ज्यादा होना
. प्रेग्नेंट महिलाओं को अचानक लेबर पेन होना
. तेज सिर दर्द या माइग्रेन
बचाव के लिए इन जरूरी उपायों को अपनाएं
. मास्क लगाकर रखें. खासतौर पर आसपास की सोसायटीज में रहने वाले लोग कम से कम एक हफ्ते तक लगातार मास्क लगाकर रखें. इससे डस्ट पार्टिकल फेफड़ों के अंदर नहीं जाएंगे.
. आंखों पर चश्मा लगाकर रखें.
. अगर उस इलाके से गाड़ी से गुजर रहे हैं तो शीशे बंद रखें,
. घरों की खिड़कियां बंद रखें. घर में एयर फिल्टर लगाकर रखें.
. पोषणयुक्त भोजन करें, पानी ज्यादा पीएं.
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Tags: Supertech twin towerFIRST PUBLISHED : August 28, 2022, 17:29 IST